नई दिल्ली 4 अप्रैल 26* स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं- केंद्रीय ऊर्जा मंत्री
नई दिल्ली *उत्तर प्रदेश सहित देश भर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण सामने आया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए साफ किया है कि स्मार्ट मीटर प्रीपेड मोड में लगेंगे या पोस्टपेड, यह पूरी तरह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर है। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत, बिजली कंपनियां केवल उपभोक्ता की लिखित सहमति के बाद ही प्रीपेड कनेक्शन दे सकती हैं। यदि उपभोक्ता इसके लिए तैयार नहीं है, तो विभाग की जिम्मेदारी है कि वह वहां पारंपरिक पोस्टपेड मीटर ही लगाए।
इस स्पष्टीकरण के बाद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का आरोप है कि यूपी में लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के घरों में बिना उनकी जानकारी या सहमति के जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा दिए गए, जो कि राष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है। परिषद ने मांग की है कि राज्य सरकार और पावर कॉर्पोरेशन उन सभी उपभोक्ताओं से दोबारा सहमति लें और जो उपभोक्ता प्रीपेड मोड नहीं चाहते, उनके मीटर तत्काल पोस्टपेड में बदले जाएं। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे नए मीटर लगवाते समय लिखित में अपनी पसंद (प्रीपेड या पोस्टपेड) दर्ज कराएं ताकि विभाग उन पर जबरन कोई सुविधा न थोप सके।
केंद्रीय मंत्री के जवाब की मुख्य बातें:
सहमति अनिवार्य: बिना उपभोक्ता की रजामंदी के प्रीपेड मीटर लगाना गैर-कानूनी है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट: यदि कोई स्वेच्छा से प्रीपेड मीटर चुनता है, तो उससे सुरक्षा राशि (Security Deposit) नहीं ली जाएगी।
सुविधाएं: प्रीपेड मीटर में रियल-टाइम खपत की निगरानी और बिल में छूट जैसी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन यह विकल्प अनिवार्य नहीं है।
नियामक आयोग की भूमिका: विशेष परिस्थितियों में बिना सहमति मीटर लगाने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग की पूर्व अनुमति आवश्यक है।

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