June 1, 2026

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कौशाम्बी1जून26*आला अफसरों के नाक के नीचे चल रही प्राइवेट नौकरशाही, तहसील में ‘मुंशी राज’ हावी..*

कौशाम्बी1जून26*आला अफसरों के नाक के नीचे चल रही प्राइवेट नौकरशाही, तहसील में ‘मुंशी राज’ हावी..*

कौशाम्बी1जून26*आला अफसरों के नाक के नीचे चल रही प्राइवेट नौकरशाही, तहसील में ‘मुंशी राज’ हावी..*

 

*कौशांबी ब्यूरो।* जनपद की तहसीलों में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अधिकारियों की मौजूदगी में ही एक समानांतर “प्राइवेट नौकरशाही” सक्रिय है, जिसे स्थानीय लोग ‘मुंशी राज’ कह रहे हैं। खासकर तहसील सिराथू में यह व्यवस्था खुलेआम चलने की चर्चा है, जहां लगभग हर कर्मचारी के साथ निजी मुंशी काम करते दिखाई देते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, ये मुंशी न सिर्फ फाइलों के संचालन में दखल देते हैं, बल्कि आम लोगों से काम कराने के नाम पर पैसों की मांग के आरोप भी लग रहे हैं। तहसील परिसर में बिना मुंशी के काम होना मुश्किल बताया जा रहा है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि कई लेखपालों के साथ उनके निजी मुंशी सक्रिय हैं। इनमें लवकुश पटेल (सुल्तान अहमद लेखपाल के मुंशी), धीरेन्द्र सिंह (जीतलाल पटेल लेखपाल के मुंशी), छोटेलाल (धर्मराज लेखपाल के मुंशी), रोहित (रोहित लेखपाल के मुंशी), विनोद कुमार यादव (अचल सिंह लेखपाल के मुंशी) और आकाश कुमार (विनोद सोनकर लेखपाल के मुंशी) प्रमुख रूप से शामिल हैं।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। तहसील के न्यायालय परिसर में भी मुंशियों की सक्रियता देखी जा रही है। नायब तहसीलदार कोर्ट में राबेन सिंह यादव, संदीप पटेल, मनोज कुमार, अमन सिंह पटेल और ऋषि गुप्ता जैसे नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा भी मुंशियों की लंबी सूची बताई जा रही है, जो नियमित रूप से तहसील में मौजूद रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना मुंशी के कोई काम समय पर नहीं हो पाता और कर्मचारियों तक सीधे पहुंच बनाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में हर कार्य के लिए ‘सेटिंग’ की जरूरत पड़ती है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। जनता की मांग है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे, ताकि तहसील की व्यवस्था पारदर्शी और सुचारु बन सके।

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