June 21, 2024

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कौशाम्बी06अप्रैल24*चरवा थाना क्षेत्र में विशालकाय हरा पेड़ काटकर लकड़ी उठा ले गया माफिया*

कौशाम्बी06अप्रैल24*चरवा थाना क्षेत्र में विशालकाय हरा पेड़ काटकर लकड़ी उठा ले गया माफिया*

कौशाम्बी06अप्रैल24*चरवा थाना क्षेत्र में विशालकाय हरा पेड़ काटकर लकड़ी उठा ले गया माफिया*

*हरे फलदार पेड़ काटकर धरती को जंगल बनाने में लगे लकड़ी माफियाओ पर अफसर मेहरबान*

*हिंदुस्तान की धरती को सऊदी अरब ईरान इराक जैसे जंगल बनाने पर तुले लकड़ी माफियाओं की सोची समझी साजिश*

*कौशाम्बी।**हरे फलदार पेड़ को प्रतिदिन लकड़ी माफिया द्वारा काटा जा रहा है लेकिन वन विभाग से लेकर थाना पुलिस तक लकड़ी माफियाओं से लुका छुपी का खेल खेल रही है। चरवा थाना क्षेत्र के नगर पंचायत चरवा के सिरसी गांव के बाहर मदुकी रोड पर गया प्रसाद कुशवाहा का हरा विशालकाय पेड़ फिर लकड़ी माफियाओं ने काट दिया है। शनिवार को लकड़ी माफिया ने एक विशालकाय हरा नीम का पेड़ काट कर उसकी लकड़ी पिकअप में भर कर माफिया उठा ले गए हैं। हरे पेड़ों को काटने में लकड़ी माफिया के साथ आधा दर्जन से अधिक मजदूर भी प्रतिदिन लगे रहते हैं लेकिन कभी भी मजदूरों के ऊपर थाना पुलिस से लेकर वन विभाग ने कार्यवाही नहीं की है।

यह लकड़ी माफिया संदीपन घाट थाना क्षेत्र के बजहा गांव का बदलातीं के नाम से बताया जाता है। लकड़ी माफिया की इतनी जुर्रत है कि वह मौके पर खड़ा होकर के आधा दर्जन से अधिक मजदूरों को लगा करके हरे पेड़ को कटवा रहा है। मामले की शिकायत मिलने के बाद थाना पुलिस ने लकड़ी माफिया को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन खबर लिखे जाने तक लकड़ी नहीं बरामद हुई है। इसके पहले भी इलाके में तमाम हरे पेड़ों को उक्त लकड़ी माफिया द्वारा काटा गया है। एक तरफ सरकार धरती को हरा भरा करने के लिए बृह्द पौधारोपण करवा रही है तो यह पेशेवर लकड़ी माफिया पूरी धरती को जंगल बनाने में लगे हैं। आखिर इन लकड़ी माफियाओ पर वन विभाग और पुलिस क्यों मेहरबान है।

गौरतलब है कि बीते एक दशक से पेशेवर लकड़ी माफिया प्रतिदिन आधा दर्जन से अधिक मजदूरों को लेकर पेट्रोलिंग आरा मशीन के साथ हरे पेड़ के कटान पर निकल जाते हैं। इलाके में आधा दर्जन से अधिक लकड़ी माफिया सक्रिय है और इनके साथ चार दर्जन मजदूर लकड़ी कटान में पेट्रोलिंग आरा मशीन ले कर प्रतिदिन कटान में लगे हैं। लकड़ी माफिया और उनके मजदूरों का पेड़ काटने का खेल बेखौफ तरीके से प्रतिदिन चल रहा है। कुछ वर्षों के अन्तराल में कई लाख फलदार हरे पेड़ लकड़ी माफियाओ ने काट दिए हैं। यह लकड़ी माफिया हिंदुस्तान की धरती को सऊदी अरब ईरान इराक जैसे जंगल बनाने पर तुले हुए हैं। यह भी इनकी एक सोची समझी साजिश है और अप्रत्यक्ष रूप से यह मानव संकट तैयार कर रहे हैं।

लकड़ी माफियाओं पर कठोर कार्रवाई नहीं होती दिख रही है। विभागीय अफसर इन्हें रोक नहीं रहे है और अभी तक वन विभाग से लेकर पुलिस की जवाब देही नहीं तय हुई है। अधिकारी भी केवल बयानबाजी तक सीमित है जिससे कौशांबी की धरती वीरान होती दिख रही है और पौधारोपण किए जाने का कोई मतलब नहीं दिखाई पड़ रहा है। प्रतिदिन लकड़ी कटान में लगे लकड़ी माफिया के कारनामों को शासन – प्रशासन को गंभीरता से लेना होगा। इन पर मुकदमा दर्ज कराकर पूर्व के वर्षों में काटी गई लड़कियों को बरामद करते हुए उनकी संपत्तियों को नीलाम कर राजस्व के नुकसान की भरपाई करनी होगी और इन पर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर की कार्रवाई करनी होगी इनके साथ – साथ लकड़ी माफिया को संरक्षण देने वाले वन विभाग के अफसरो को भी चिन्हित कर उन पर कठोर कार्रवाई किए जाने की जरूरत है तभी हरे पेड़ की लकड़ियों के कटान पर रोक लग सकती है।

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