April 6, 2026

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कौशाम्बी 6 अप्रैल 26* यूपीआजतक न्यूज चैनल पर कौशाम्बी कि कुछ महत्वपूर्ण खबरें 

कौशाम्बी 6 अप्रैल 26* यूपीआजतक न्यूज चैनल पर कौशाम्बी कि कुछ महत्वपूर्ण खबरें 

कौशाम्बी 6 अप्रैल 26* यूपीआजतक न्यूज चैनल पर कौशाम्बी कि कुछ महत्वपूर्ण खबरें 

 

[06/04, 19:56] +91 98391 01290: *चोरी के सामान के साथ 02 अभियुक्तों को सैनी पुलिस ने किया गिरफ्तार*

*कौशाम्बी।* सैनी कोतवाली पर 03 अप्रैल को त्रियुगी नारायण पुत्र लुसी निवासी ग्राम थुलगुला थाना सैनी द्वारा सूचना दी गयी कि थुलगुला स्थित मेरा मकान जिसमें ताला लगा रहता है, दिनांक 02.04.2026 को साफ-सफाई के लिये अपने घर आया तो देखा कि रोशनदान का छड़ कटा हुया था और कमरे के ताले टूटे हुये थे,अन्दर जाकर देखा गया तो पीली धातु टप्स,अगुठी व बर्तन तथा टीबी चोरी हो गयी है सैनी कोतवाली पर मु0अ0सं0 120/2026 धारा 331(1)/305(1) बीएनएस पंजीकृत हुआ थाना सैनी पुलिस ने आस-पास के लोगो से पूछताछ,सर्विलांस एवं सीसीटीवी के माध्यम से साक्ष्य संकलित करते हुये दिनांक 05/06.04.2026 की रात्रि में वांछित अभियुक्त देवा यादव पुत्र चन्द्रभान वा दीपक कुमार पुत्र स्व0 गुलाब निवासीगण ग्राम थुलगुला थाना सैनी को अलीपुर जीता नहर के पास से गिरफ्तार किया अभियुक्तों के कब्जे से चोरी का 12 पीली धातु का लोटा, 03 पीली धातु की थाली, 01 जोडी कान के टप्स पीली धातु एवं 01 एलईडी टीवी बरामद किया विधिक कार्यवाही के पश्चात अभियुक्तों को न्यायालय भेजा गया है अभियुक्तों ने जुर्म कबूल किया है

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[06/04, 20:08] +91 98391 01290: *पुलिस अधीक्षक ने पुलिस कार्यालय में की जनसुनवाई,*

*फरियादियों की समस्याओं को सुना एवं समाधान हेतु दिए आवश्यक निर्देश*

*कौशाम्बी।* पुलिस कार्यालय कौशाम्बी में दिनांक 06.04.2026 को पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत द्वारा आम जनमानस की समस्याओं के प्रभावी निस्तारण हेतु जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस दौरान जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए फरियादियों ने अपनी समस्याओं से संबंधित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए,जिन्हें पुलिस अधीक्षक द्वारा अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना गया मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने संबंधित थाना प्रभारियों एवं शाखा प्रभारियों को मौके पर जाकर त्वरित और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी न होकर गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, जिससे पीड़ित व्यक्ति को वास्तविक न्याय और राहत मिल सके। सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत को समयबद्ध तरीके से निस्तारित किया जाए।

[06/04, 20:08] +91 98391 01290: *डीएम के निर्देश पर 8 महीने पहले शुरू हुई जांच पूरी नहीं कर सके जांच अधिकारी*

*तो फिर विभागीय अधिकारियों का रैकेट सरकारी रकम के घोटाले में गिरोह बनकर है शामिल*

*फर्जी तरीके से निस्तारण किए जा रहे हैं आइजीआरएस फरियादियों को नहीं मिल रहा न्याय*

*करोड़ों के घोटाले की शिकायत पर जांच अधिकारी नियुक्त कर निस्तारित कर दिया गया आइजीआरएस*

*कौशाम्बी।* जिले में बढ़ते भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के बजाय शिकायत का निस्तारण कर सरकार की नजरों में भले ही वाहवाही लूटी जा रही हो लेकिन हकीकत यह है कि शिकायतों के निस्तारण में आम जनता को न्याय नहीं मिल रहा है बढ़ते भ्रष्टाचार में विभागीय अधिकारी शामिल है और विकास योजना के नाम पर योजना से जुड़े लोग कमीशन और भ्रष्टाचार में शामिल है भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद भी मामले का निस्तारण नहीं होता है भ्रष्टाचार करने वालों को दंड नहीं मिलता बल्कि शिकायत करने वाले के आइजीआरएस की शिकायत का फर्जी तरीके से निस्तारण कर दिया जाता है जिससे विभागीय अधिकारियों की भी भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हैं ताजा मामला मूरतगंज विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत सैय्यद सरावां से जुड़ा है जहां करोड़ों के घोटाले की शिकायत ग्रामीणों ने की भ्रष्टाचार की शिकायत आइजीआरएस पोर्टल नंबर 200 174 2 4007460 पर गांव को लोगों ने दर्ज कर भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को दंडित किए जाने की मांग की शिकायत के बाद 9 अगस्त 2025 को सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया और इसी पत्र को आधार मानकर पूरे भ्रष्टाचार कि शिकायत को आईजीआरएस में निस्तारण कर दिया जिससे आईजीआरएस में शिकायत निस्तारित हो गई लेकिन गांव के भ्रष्टाचार की जांच नहीं पूरी हुई 17 दिसंबर 2025 को जांच अधिकारी सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने खंड विकास अधिकारी मूरतगंज को पत्र लिखकर अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया लेकिन साढ़े तीन महीने बीत जाने के बाद खंड विकास अधिकारी ने जांच अधिकारी को अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए हैं धीरे-धीरे समय 8 महीने बीत गए लेकिन दोषियों पर तो कार्यवाही नहीं हुई और जांच को लटकाने वाले जांच अधिकारी सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई इतना ही नहीं जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा इनको जांच अधिकारी 9 अगस्त 2025 को नियुक्त किए जाने के बाद 5 महीने तक तो पूरे प्रकरण को रद्दी में डाल दिया था और 5 महीने बाद 17 दिसंबर 2025 को खंड विकास अधिकारी से अभिलेख मांगे जिससे जांच अधिकारी की भी भूमिका पर सवाल खड़े हैं अब सवाल उठता है कि आईजीआरएस में शिकायत का फर्जी निस्तारण अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जांच अधिकारियों द्वारा कोई काम नहीं किया जा रहा है जांच के दौरान सरकारी अभिलेख जांच अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं तो यह कहा जा सकता है कि सरकारी रकम के घोटाले में अधिकारियों का रैकेट गिरोह बनकर शामिल है दोषियों को दंड न मिलने और शिकायत का निस्तारण न होने जांच अधिकारी को हीलाहवाली के चलते मामले को लेकर फिर शिकायतकर्ता गुलाम नबी ने जिला अधिकारी से मिलकर संपूर्ण प्रकरण बताते हुए जांच को निस्तारण करने और दोषियों को दंड देने की मांग की है

*सुशील केसरवानी वरिष्ठ पत्रकार व ब्यूरो प्रमुख मंझनपुर कौशाम्बी* *9838824938*
[06/04, 20:09] +91 96486 24949: *जिला पंचायत बैठक में हंगामा विकास कार्यों को लेकर सदस्यों का विरोध*

*कौशाम्बी*। जिला पंचायत की बैठक उस समय हंगामे में बदल गई जब पंचायत सदस्यों ने अपने-अपने वार्डों में विकास कार्य न कराए जाने को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बैठक के दौरान कई सदस्यों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तीखी नाराज़गी जताई।सदस्यों का कहना था कि लंबे समय से उनके वार्डों में सड़क, नाली,पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य लंबित पड़े हैं,लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट का सही तरीके से उपयोग नहीं हो रहा है, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बैठक के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। कई सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा और जल्द से जल्द विकास कार्य शुरू कराने की मांग की।वहीं प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और जल्द ही लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि जिले में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर जनप्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विरोध के बाद कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और जनता को राहत दिलाने में कितना सफल होता है।

 

[06/04, 20:31] +91 99194 75893: *पश्चिम शरीरा चौराहों पर भीख मांगने को मजबूर नौनिहाल*

*बचपन’ पर सिस्टम की काली फिल्म खाने की दुकानों पर फैला रहे हाथ*

*कौशाम्बी*।​एक तरफ सूबे की सरकार ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘स्कूल चलो अभियान’ के जरिए हर बच्चे के हाथ में किताब और उज्ज्वल भविष्य का सपना संजो रही है,वहीं कौशाम्बी के पश्चिम शरीरा कस्बे की सड़कों पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कस्बे के मुख्य चौराहे और प्रमुख खाने-पीने की दुकानों के पास इन दिनों मासूम बच्चों की फौज हाथों में किताब के बजाय कटोरा थामे नजर आ रही है। भूख से बिलखते ये नौनिहाल आने-जाने वालों के सामने हाथ फैलाते हैं,लेकिन सिस्टम की आंखें जैसे इस कड़वी हकीकत पर ‘काली फिल्म’ चढ़ाए बैठी हैं दुकानों के बाहर बचपन सिसक रहा है पश्चिम शरीरा चौराहे के पास स्थित चाट, समोसे और मिठाई की दुकानों पर शाम ढलते ही इन बच्चों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। गंदे कपड़ों में लिपटे,नंगे पांव ये मासूम ग्राहक के पास पहुँचकर भीख मांगते हैं। कई बार दुकानदार इन्हें डांटकर भगा देते हैं,तो कई बार लोग तरस खाकर कुछ पैसे या खाने की चीज दे देते हैं। विडंबना यह है कि इनमें से अधिकांश बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हैं,लेकिन पारिवारिक मजबूरी या कथित सिंडिकेट के दबाव में ये इस दलदल में फंसते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नजारा रोज़ का है,लेकिन कभी किसी अधिकारी ने इन्हें रेस्क्यू करने या इनके पुनर्वास की कोशिश नहीं की।जनपद पुलिस द्वारा ‘मिशन शक्ति’ और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं,लेकिन क्या इन मासूमों को सुरक्षा और शिक्षा का अधिकार नहीं है? यह एक बड़ा सवाल है पश्चिम शरीरा के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाए जाएं। इन्हें भीख मांगने के दलदल से निकालकर स्कूल पहुँचाया जाए और यदि इनके पीछे कोई संगठित गिरोह है,तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए। वरना, सिस्टम की यह बेरुखी इन नौनिहालों को अपराध के रास्ते पर धकेलने का काम करेगी।

[06/04, 21:26] +91 99191 96696: *जिन दुकानों में नहीं रहता लाखों का सामान उन दुकानों से करोड़ों का सामान खरीद रही है ग्राम पंचायतें*

*जिन व्यापारियों के बिल वाउचर पर ग्राम पंचायत के बैंक खाते से लाखों रुपए का भुगतान कराए जा रहे हैं उनकी अफसर ने नहीं की जांच*

*अफसरों ने यदि हकीकत की जांच की तो ग्राम प्रधान पंचायत सचिव के साथ-साथ फर्जीवाड़ा में शामिल दर्जनों व्यापारी भी जाएंगे जेल*

*कौशांबी।* ग्राम पंचायत में व्यापारियों की साठगांठ से बढ़ते भ्रष्टाचार के बाद एक बार फिर तमाम नए सवाल खड़े हो गए हैं कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की साठगांठ से फर्जी बिल लगा करके बैंक खाते से विकास योजनाओं की रकम निकाली जा रही है पंजीकृत फर्म के आड़ में व्यापारियों की साठगांठ से ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार खुलेआम हो रहा है लेकिन अफसरों को दिखाई नहीं पड़ रहा है या फिर अफसर भ्रष्टाचार की रकम में हिस्सेदार हैं यह तो बड़ी जांच का विषय है जिले में जिन दुकानों में लाखों रुपए का सामान मौजूद नहीं है वह साल में करोड़ों रुपए के सामान की सप्लाई का बिल वाउचर ग्राम पंचायत को दे देते हैं और दुकानदारों के इस बिल वाउचर पर सरकारी खजाने से पंचायत सचिव ग्राम प्रधान मिलकर के खजाने से लाखों की रकम निकाल लेते है अब सवाल उठता है कि जिन व्यापारियों की दुकानों में लाखों रुपए के समान नहीं है वह करोड़ों रुपए के सामान कैसे ग्राम पंचायत को सप्लाई कर देते हैं लेकिन कभी अफसर ने उन व्यापारियों की जांच नहीं की जिन व्यापारियों के बिल वाउचर पर ग्राम पंचायत के बैंक खाते से लाखों रुपए का भुगतान कराए जा रहे हैं इसी तरह का एक ताजा मामला इन दिनों कड़ा विकासखंड क्षेत्र के गनपा ग्राम पंचायत से जुड़ा हुआ सामने आया है जहां बाला जी इंटर प्राइजेस एंड सप्लायर्स मोगरी कड़ा के बिल संख्या 351 बिल संख्या 354 बिल संख्या 361 बिल संख्या 365 बिल संख्या 368 बिल संख्या 370 के जरिए 25 मार्च 2026 को एक दिन में 10 लाख रुपए से अधिक का हैवेल्स स्टील लाइट सेंसर के साथ सप्लाई करने का 6 बिल जारी किया गया है जबकि इस दुकान में हैवेल्स स्ट्रीट लाइट का सामान मौजूद नहीं है आखिर दुकान में समान मौजूद नहीं है तो दुकान से 10 लाख रुपए के सामान की बिक्री कैसे हो गई ग्राम पंचायत से 10 लाख रुपए भुगतान कराए जाने के बाद गांव में एक भी हैवेल्स के स्ट्रीट लाइट सेंसर के साथ नहीं लगाई गई है जिससे ग्राम पंचायत का भी घोटाला इसके साथ जुड़ा हुआ है व्यापारी और ग्राम पंचायत ने मिलकर सरकारी खजाने से 10 लाख रुपए की रकम का गबन किया है जो बड़ी जांच का विषय है अधिकारियों ने जांच कराई तो जहां ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान की मुसीबत बढ़ेगी वहीं बालाजी इंटरप्राइजेज एंड सप्लायर दुकान के प्रोपराइटर और पार्टनर्स की भी मुसीबत बढ़ेगी भ्रष्टाचार कर सरकारी रकम हड़प कर जाने वाले पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान का सहयोग करने वाले व्यापारी की भी मुसीबत बढ़ेगी और पंचायत सचिव ग्राम प्रधान के साथ-साथ व्यापारी पर भी मुकदमा दर्ज होगा लेकिन क्या मामले को आला अधिकारी संज्ञान लेकर सरकारी रकम हड़प करने वाले ग्राम प्रधान पंचायत सचिव का समर्थन कर फर्जी बिल वाउचर जारी करने वाले इस दुकानदार की गिरफ्तारी कर इस पर मुकदमा दर्ज कर इसको जेल भेजा जाएगा या फिर सब कुछ फर्जीवाड़ा जिले में चलता रहेगा इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन मीटिंग में होने के चलते उनसे बात नहीं हो सकी है गनपा ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचार के संबंध में बात करने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार सिंह से भी बात की गई तो उनका कहना है कि जांच कराई जाएगी सुशील कुमार त्रिपाठी ने मामले की शिकायत जिला अधिकारी से कर दोषियों को दंडित करने की मांग की है।

*सुशील केसरवानी वरिष्ठ पत्रकार ब्यूरो चीफ  जनपद कौशांबी* 9838824938
[06/04, 21:53] +91 99562 82731: *तुलसीपुर की सरकारी जमीन पर होता रहा कब्जा अधिकारी बजाते रहे चैन की बंसी*

*कौशाम्बी* सिराथू तहसील क्षेत्र के तुलसीपुर ग्राम सभा में सरकारी जमीन गाटा संख्या 144 पर कब्जे की शिकायत ग्रामीणों ने 10 दिन पहले अधिकारियों से की थी लेकिन उसके बाद भी सरकारी जमीन का कब्जा निरंतर चलता रहा और दीवाल उठाने के बाद सरकारी जमीन पर लोगों ने छत बना लिया है जांच के नाम पर तहसील के अधिकारी 10 दिनों से केवल नाटक करते रह गए हैं तहसील के अधिकारी नहीं चाहते थे कि सरकारी जमीन का कब्जा रोका जाए जिससे तहसील के अधिकारियों के सरकारी जमीन कब्जा करने में शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता है सरकारी जमीन में कब्जा किए जाने का यह मामला संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने अवैध कब्जा नहीं रोका है जो उनकी निष्ठा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है

गौरतलब है कि सिराथू तहसील अंतर्गत तुलसीपुर ग्राम सभा में सरकारी भूमि गाटा संख्या 144 पर अवैध कब्जा कराने का मामला दस दिन पहले अधिकारियों के सामने पहुंचा था ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि लेखपाल की मिलीभगत से ग्राम सभा की जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जा कराया जा रहा है।ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए चिन्हित है,लेकिन हाल के दिनों में सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया।जब गांव के लोगों ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाने की भी बात सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई,लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्राम प्रधान और अन्य ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है लेकिन सरकारी जमीन में कब्जे के मामले में 10 दिन के बीच जांच करना तो दूर रहा उल्टा जिम्मेदारों ने सरकारी जमीन पर कब्जा करवा दिया 10 दिन पहले ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया था कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी जमीन पर पूरी तरह से कब्जा हो जाएगा लेकिन उसके बाद भी अधिकारियों ने इस गम्भीर मामले को गंभीरता से नहीं लिया सरकारी जमीन में कब्जा किए जाने के बाद गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।इस संबंध में लेखपाल से संपर्क करने की कोशिश की गई,लेकिन उनका पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका।वहीं तहसील प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल उठता है कि 10 दिन से अभी तक तहसील प्रशासन ने सरकारी जमीन के कब्जे को क्यों नहीं रोका है इसके पीछे तहसील प्रशासन की क्या मनसा खड़ी थी ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ग्राम सभा की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के साथ-साथ कब्जा ना रोकने वाले अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए