औरैया 05 अप्रैल *मां कुष्मांडा की पूजा के लिए मंदिरों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़*
*जिले के विभिन्न कस्बों व ग्रामीणांचलों में भी देवी मां की हुई पूजा*
*औरैया।* चैत्र नव दुर्गा के चौथे दिन मंगलवार को विभिन्न देवी मंदिरों पर मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना एवं आराधना के लिए श्रद्धालु भक्तजनों का जनसैलाब उमड़ा। देवी मंदिरों पर श्रद्धालु भक्त जनों ने मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना के साथ मन्नतें मांगी। सुबह से ही जहां एक और मां-बहनों ने मंदिरों पर पहुंचकर दर्शन करते हुए पूजन किया, वही सारे दिन देर शाम तक देवी मंदिरों पर श्रद्धालु भक्तजनों का आवागमन जारी रहा। घरों में भी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की है।
शहर से तकरीबन 5 किलोमीटर दूर दुर्गम बीहड़ में स्थित मां मंगला काली मंदिर के अलावा शहर में स्थित मोहल्ला बनारसी दास स्थित महामाया काली माता मंदिर, महावीर गंज स्थित काली माता मंदिर, नरायनपुर स्थित गमा देवी एवं संतोषी माता मंदिर तथा पढीन दरवाजा स्थित बड़ी माता मंदिर व शीतला माता मंदिर के साथ ही रुहाई मोहाल में विंध्यवासिनी मंदिर के अलावा क्षेत्र के ग्राम खरका गढ़धाम स्थित गढीमाता में कुलदेवी बड़ी माता तथा छोटी माता के अलावा बेला खेरे (बसंतपुर) स्थित बेला खेरे माता (बूढ़ी माता) मंदिर समेत विभिन्न देवी मंदिरों पर श्रद्धालु भक्तजनों ने पहुंचकर देवी के दर्शन किए। इसके साथ ही पूजा-अर्चना के साथ ही मन्नते मांगी। यह सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा। इसके साथ ही घरों में स्थापित की गई देवी मां के दरबार में श्रद्धालु भक्तजनों ने मनवांछित फल प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा देवी की पूजा-अर्चना कर अनुष्ठान के किये। इसके साथ ही कन्या भोज भी कराए। इसी तरह से जनपद के विभिन्न कस्बों दिबियापुर, कंचौसी, सहार, बेला, बिधूना, एरवाकटरा, कुदरकोट, कन्हों स्थित महामाई मंदिर के साथ ही अछल्दा, फफूंद, अटसू, अजीतमल, बाबरपुर, मुरादगंज व अयाना के अलावा जनपद के विभिन्न ग्रामीणांचलों में देवी मंदिरों पर श्रद्धालु भक्तजनों के द्वारा पूजा-अर्चना किए जाने की समाचार प्राप्त हुए हैं।

More Stories
कौशाम्बी २ मार्च २६*बाइक सवार दंपति को तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर दंपत्ति घायल
अयोध्या2 मार्च 26*जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष*
वाराणसी 2 मार्च 26*दिनांक 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को काशी में ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण घटित होगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण के 9 घंटे पूर्व से सूतक का विधान बताया गया है।