उन्नाव8 अक्टूबर 26*सपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश, चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर सड़क पर उतरे कार्यकर्ता
उन्नाव (मोनू सिंह की रिपोर्ट – यूपी आजतक):
उन्नाव *उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यालय से लेकर शहर के प्रमुख चौराहों तक कार्यकर्ताओं ने हुंकार भरी और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग उठाई। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे पूरे शहर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
सड़कों पर उमड़ा सपा कार्यकर्ताओं का सैलाब
प्रदर्शन के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुबह से ही जिले भर के सपा नेता, पूर्व विधायक, पदाधिकारी, युवा विंग के सदस्य और सैकड़ों की तादाद में कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पर जुटना शुरू हो गए थे। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में एक विशाल जुलूस निकाला गया। हाथों में तख्तियां, बैनर और लाल-हरे झंडे लिए कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का काफिला जैसे-जैसे आगे बढ़ा, आसपास के लोग भी इस विरोध प्रदर्शन को देखने के लिए रुक गए।
प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्गों पर कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए माहौल को गरमा दिया। कार्यकर्ताओं की आवाज में व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। उनका कहना था कि लोकतंत्र की आत्मा निष्पक्ष चुनाव में बसती है, लेकिन जिस तरह से मौजूदा दौर में संस्थाओं के निर्णयों और कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, उससे आम जनता और विपक्षी दलों का विश्वास डगमगा रहा है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर खड़े किए तीखे सवाल
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सपा के प्रमुख नेताओं ने चुनाव आयोग पर सत्ताधारी दल के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। सपा प्रवक्ताओं और जिला स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त और संवैधानिक संस्था से देश को निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद होती है। लेकिन हाल के समय में जिस तरह के निर्णय लिए गए हैं और विपक्ष की शिकायतों की लगातार अनदेखी की जा रही है, उससे निर्वाचन प्रणाली की साख को गहरा धक्का लगा है।
नेताओं ने सीधे तौर पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को किसी पार्टी विशेष के हितों की पूर्ति करने के बजाय संविधान की मर्यादा और जनता के मताधिकार की रक्षा करनी चाहिए। जब तक आयोग की कमान निष्पक्ष हाथों में नहीं होगी, तब तक लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में रहेगी। कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि चुनाव आयुक्त अपने पद की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने में असमर्थ हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का लिया संकल्प
धरना-प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से डॉ. राम मनोहर लोहिया और नेताजी मुलायम सिंह यादव के दिखाए रास्ते पर चलकर हक और इंसाफ की लड़ाई लड़ती रही है। जब भी लोकतंत्र को दबाने या संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करने की कोशिश की जाएगी, समाजवादी कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे।
नेताओं ने कहा, “यह लड़ाई केवल समाजवादी पार्टी की नहीं है, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के मताधिकार की गरिमा को बचाने की लड़ाई है। जनता का वोट ही लोकतंत्र की ताकत है, और अगर वोटिंग प्रक्रिया या उसे संचालित करने वाली संस्थाओं पर ही जनता का भरोसा खत्म हो गया, तो देश का लोकतांत्रिक ढांचा बिखर जाएगा।” कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे इस मुद्दे को हर गांव, कस्बे और घर-घर तक लेकर जाएंगे ताकि जनता को सच्चाई से अवगत कराया जा सके।
पुलिस और प्रशासन रहा पूरी तरह सतर्क
सपा के उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा तुरंत एक्शन मोड में आ गया। किसी भी अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए शहर के प्रमुख चौराहों, कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस के आला अधिकारी लगातार मार्च पर नजर रखे हुए थे। कई जगहों पर बैरिकेडिंग लगाकर कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से लेकिन बेहद कड़े शब्दों में अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के समापन पर समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। ज्ञापन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से दर्ज की गई।
मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यह विरोध प्रदर्शन तो केवल एक शुरुआत है। अगर सरकार और संबंधित तंत्र ने चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की और चुनाव आयुक्त के आचरण को लेकर उठ रहे सवालों का उचित जवाब नहीं दिया, तो समाजवादी पार्टी इस आंदोलन को ब्लॉक स्तर से लेकर राजधानी लखनऊ और दिल्ली तक ले जाने से पीछे नहीं हटेगी।
कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया कि जब तक संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता बहाल नहीं होती और निष्पक्ष चुनाव की गारंटी नहीं मिलती, तब तक समाजवादी सड़क से लेकर सदन तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्नाव में हुए इस विशाल प्रदर्शन ने जिले के राजनीतिक पारे को पूरी तरह चढ़ा दिया है।
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