July 17, 2024

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अयोध्या3जुलाई24*दर्जनों कंपोजिट/ प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में भरा पानी, कैसे हो पठन पाठन

अयोध्या3जुलाई24*दर्जनों कंपोजिट/ प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में भरा पानी, कैसे हो पठन पाठन

अब्दुल जब्बार

अयोध्या3जुलाई24*दर्जनों कंपोजिट/ प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में भरा पानी, कैसे हो पठन पाठन

आखिर इस कीचड़ युक्त जलभराव का जिम्मेदार कौन ?

अभिलेखों में स्वच्छता शत प्रतिशत भले हो, परंतु मौके पर स्थिति बद से बद्तर,

भेलसर(अयोध्या)तहसील रुदौली के विकासखंड/ शिक्षण क्षेत्र मवई के दो दर्जन से अधिक कंपोजिट तथा प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में कीचड़ युक्त जलभराव कुछ और कहानी बयां कर रहा है। एक जानकारी के अनुसार शिक्षण क्षेत्र मवई के कंपोजिट विद्यालय बाबा बाजार, प्राथमिक विद्यालय अमीरपुर, प्राथमिक विद्यालय धनौली, प्राथमिक विद्यालय पठान पुरवा ,कंपोजिट विद्यालय सुल्तानपुर, प्राथमिक विद्यालय दुर्गी का पुरवा, जूनियर हाई स्कूल जयसुखपुर, प्राथमिक विद्यालय कामापुर ,कंपोजिट विद्यालय नेवाजपुर, प्राथमिक विद्यालय रसूलपुर आदि दर्जनों विद्यालयो के परिसरों में बड़ी-बड़ी घास उगी रहने, जगह जगह गंदगी का साम्राज्य ,भारी मात्रा में कीचड़ युक्त जल भराव होने के कारण छात्र- छात्राओं एवं शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपर्युक्त सभी विद्यालयों में शिक्षारत बालक /बालिकाओं तथा शिक्षकों को उक्त कीचड़ युक्त पानी में प्रवेश होकर शिक्षण कक्ष जाना पड़ रहा है। इस दूषित पानी से पांव में विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोगों का प्रकोप हो जाने की आशंका खाये जा रही, है, परंतु जल निकासी का समाचार प्रेषण तक कोई व्यवस्था किसी के भी द्वारा सुनिश्चित नहीं कराई गई ,जो चिंता का विषय बना हुआ है,
जहां एक ओर शासन की मंशा के अनुरूप प्रशासन द्वारा बार-बार स्वच्छ भारत/ सुंदर भारत का नारा देकर नित नई व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं, वही उक्त कंपोजिट तथा प्राथमिक विद्यालयों में कीचड़ युक्त जल भराव होने की कहानी कुछ और बयां कर रही है, अगर समय रहते उक्त जल निकासी की व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा कार्यदायी संस्था द्वारा कराया गया होता ,तो शायद यह दिन नहीं देखने पड़ते, जिसका खामियाजा विद्यालयों में शिक्षार्जन कर रहे बालक/ बालिकाओं तथा शिक्षा दे रहे शिक्षकों को मौजूदा समय में भुगतना पड़ रहा है, यहां बताना उचित होगा कि अभिलेखों में भले ही कंपोजिट तथा प्राथमिक विद्यालयों का शत प्रतिशत, चतुर्दिक विकास एवं उत्थान का ढिंढोरा पीटा जा रहा हो, परंतु मौके पर स्थित बद से बद्तर है ,जो कभी भी देखी जा सकती है ।

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