July 14, 2024

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अनूपपुर29जून24*IPER भोपाल के इंटरनेशनल कॉन्‍फ्रेंस में एडीजीपी डी. सी. सागर के शोध पेपर को मिला ''बेस्‍ट पेपर अवार्ड''

अनूपपुर29जून24*IPER भोपाल के इंटरनेशनल कॉन्‍फ्रेंस में एडीजीपी डी. सी. सागर के शोध पेपर को मिला ”बेस्‍ट पेपर अवार्ड”

अनूपपुर29जून24*IPER भोपाल के इंटरनेशनल कॉन्‍फ्रेंस में एडीजीपी डी. सी. सागर के शोध पेपर को मिला ”बेस्‍ट पेपर अवार्ड”

अनूपपुर (ब्यूरो राजेश‌ शिवहरे )29 जून 2024 को IPER (Institute of Professional Education & Research) भोपाल और CII (Confederation of Indian Industry) मध्‍य प्रदेश द्वारा आयोजित एक इंटरनेशनल कॉन्‍फ्रेंस में डी.सी. सागर, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक शहडोल जोन के शोध पेपर को ”बेस्‍ट पेपर अवार्ड” से नवाजा गया है। यह इंटरनेशनल कॉन्‍फ्रेंस ”World Economic Growth – India is a Growth Stimulus” पर आयोजित किया गया था।

यह उल्‍लेखनीय है कि एडीजीपी डी.सी. सागर बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय भोपाल से प्रबंधन विषय पर पीएचडी कर रहे हैं। इस इंटरनेशनल कॉन्‍फ्रेंस में उन्‍होंने ”कोविड-19 महामारी, सोशल मीडिया की लत और जनता के स्वास्थ्य का प्रबंधन” (Covid-19 pandemic, social media addiction and management of health of public) पर अपना शोध पेपर प्रस्‍तुत किया। शोध पेपर का श्रीगणेश कोविड 19 में दिवंगत आत्‍माओं को सादर श्रद्धाजंलि दी और कोरोना वारियर्स को उनकी बहादुरी, निस्‍वार्स्‍थ सेवा एवं अपनी जान की परवाह न कर कार्य करने के लिए सादर आभार व्‍यक्‍त किया। साथ ही इंटरनेट एडिक्‍शन की कालजयी शोधकर्ता डॉ. किम्‍बरले एस यंग जिनकी मृत्‍यु वर्ष 2019 में हुई, उनको भी सादर श्रद्धांजलि दी गई और उनके उल्‍लेखनीय शोध कार्यों जैसे- Caught in the Net (1998), Evolution and Treatment of Internet Addiction (1999) आदि को याद किया।

उन्‍होंने बताया कि विश्‍व में वर्ष 2019 में 4.2 बिलियन लोग इंटरनेट का उपयोग रहे हैं, जिनमें से 3.4 बिलियन (67.1%) लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते थे। वर्तमान में विश्‍व में 5.4 बिलियन लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं जिनमें से 5.07 बिलियन (62.6%) लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। वर्तमान में इंटरनेट का औसत दैनिक उपयोग 2 घंटे 23 मिनट है। उन्‍होंने बताया कि डॉ. मार्क डी ग्रिफ़िथ के अनुसार 6 मुख्य कारक हैं जो किसी व्यक्ति को किसी भी गतिविधि का आदी बनाते हैं : प्राथमिकता की समस्या (salience) , मनोदशा में संशोधन (mood modification), वापसी के लक्षण (withdrawal symptom), बढ़ी हुई सहनशीलता (increased tolerance), संघर्ष (conflict), पुनरावृत्ति (relapse). उनके शोध का सार तथ्‍य यह है कि कोविड-19, सोशल मीडिया की लत और जन स्वास्थ्य प्रबंधन में आपस में घनिष्ठ अंतर्संबंध देखा जा सकता है।

इस अवसर पर उन्‍होंने भारत रत्न, भारत के पूर्व प्रधान मंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा लिखित एक विश्व प्रसिद्ध कविता प्रस्‍तुत किया :

“.…..हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।
आज झकझोरता तेज़ तूफा़न है,
नाव भँवरों की बॉंहों में मेहमान है।
पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई,
मौत से ठन गई।”

कोविड-19 महामारी के दौर में भारत और विश्‍व के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों में इसी प्रकार की इच्छाशक्ति का प्रादुर्भाव हुआ होगा कि इस महामारी पर विजय प्राप्त करनी है और कोरोना वायरस से लोगों के जीवन की रक्षा करनी है अर्थात “मौत से ठन गई, वैक्सीन बन गई ।”

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