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औरैया 18 मार्च *भागवत कथा में श्रोताओं को क्या भाव विभोर*

औरैया 18 मार्च *भागवत कथा में श्रोताओं को क्या भाव विभोर*

*औरैया।* नयी वस्ती इंद्रानगर दिबियापुर मे चल रही से श्रीमद भागवत कथा मे आज गुरुवार को आचार्य मनोज अवस्थी जी द्वारा भागवत का वाचन हुआ। आचार्य ने भक्ति ज्ञान वैराग्य की बहुत सुंदर कथा सुनाई। उसके बाद गोकर्ण धुन्दकारी का उपाख्यान सुनाया। आचार्य जी ने कहा कि संसार के लोग हमें नहीं चाहते हमसे चाहते है जबकि परमात्मा हमसे कुछ नहीं चाहता हमें परमात्मा के प्रति समर्पित होना चाहिए उसके बाद शुक देव जी के जन्म की कथा सुनाई उसके उपरांत दुर्योधन के मृत्यु की कथा सुनाई , और कहा कि दुर्योधन भी जब मरा तब उसे परिवार की ही याद आई , और कहा कि खून के रिश्तों में कितनी भी दूरियाँ आ जाये पर वह कभी अलग नहीं किये जा सकते। मरते समय दुर्योधन को भी अपने परिवार की बहुत याद आई , और दूसरी तरफ अश्वत्थामा के द्वारा द्रोपदी के पांच बच्चो की हत्या कर दी गई फिर भी द्रोपादी ने अश्वत्थामा को क्षमा कर दिया , क्यों की भारत नारी सदा से ही त्याग और संगर्ष की पराकाष्ठा रही है। इसके बाद आचार्य ने बताया कि कुंती ने भगवान् से ऐसा माँगा की आज तक किसी ने ऐसा नहीं माँगा। कुंती ने भगवान् से माँगा की हम पर दुःख और आपत्ति पड़ती रहे क्यों कि प्रभु आपकी याद दुःख में आती है , और सुख में हम आपको भूल जाते है। महाराज जी ने कहा अगर हम भगवान् को सुख और दुःख में दोनों में याद करे तो सुख दुःख होंगे ही नहीं , और दूसरी और बताया कि माता को बच्चो को कभी बढ़ावा नहीं देना चाहिए , आगर बालक कुछ गलत करता है तो इसकी सूचना तुरंत पिता को देनी चाहिए , और बालक को रोकना चाहिए , क्यों कि अगर माता- पिता बच्चो को संस्कार नहीं देंगे तो वह भी बड़ा होकर दुर्योधन बन जायेगा , क्यों की दुर्योधन के माता- पिता धृतराष्ट्र और गान्धारी ने उसे बढ़ावा दिया तो इसके परिणाम स्वरूप भारत में महाभारत हो गया। आगे बताया कि अगर कोई व्यक्ति जीवन में कोई पूजा और तपशस्या नहीं भी कर पाता लेकिन यदि वह कभी झूठ न बोले तो भी उसकी मुक्ति हो जाती है , क्यों कि युधिष्ठर ने जीवन में कभी झूट नहीं बोला तो वह सशरीर स्वर्ग में गये, और आगे बताते है कि राजा परीक्षत को श्राप लग गया तो वह सुखतीर्थ में गये और शुख देव जी से पूछा मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए? प्राणी मात्र का कर्तव्य क्या है? इस मौके पर मेधनाथ सिंह, राम प्रकाश यादव व रमेश आदि के अलावा कथा सुनने आये क्षेत्र का विशाल आम जनमानस मौजूद रहा।

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