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टोंक 07 मार्च**किसान आंदोलन से किसानों की अभूतपूर्व सफलता**

टोंक 07 मार्च**किसान आंदोलन से किसानों की अभूतपूर्व सफलता**
यह तो पता नहीं कि किसानों द्वारा मांग की जाने वाली दो मुख्य मांगे (तीन कृषि बिलों की वापसी तथा कृषि उत्पादों को एमएसपी पर खरीदने की कानूनी गारंटी) तो पूरी होंगी या नहीं, लेकिन इस आंदोलन से न केवल हमारे देश में, बल्कि पूरे विश्व में कृषि क्षेत्र की दशा व दिशा निर्धारित होगी। भविष्य में जब भी कोई सरकार कृषि संबंधी कानून बनाएगी तो कानून बनाने से पहले सरकारों के लिए किसानों व किसान संगठनों से बातचीत करना उनकी मजबूरी हो जाएगी । वर्तमान कानूनों की तरह बिना किसी से वार्ता किये गुपचुप तरीके से अचानक ही अध्यादेश के रूप में कानून ले आना भविष्य में लगभग असंभव ही होगा । इस आंदोलन से पहले किसानों को या तो चुनाव के समय याद किया जाता था या वार्षिक बजट प्रस्तुत करने पर किसानों व देश को दिग्भ्रमित करते हुए सरकार व मीडिया द्वारा प्राय: हमेशा ही कहा जाता था कि **किसानों को समर्पित बजट!!!!**
आज देश व विदेश के लगभग सभी चैनलों पर किसान आंदोलन के बारे में चर्चा हो रही है। चर्चा चाहे पक्ष में हो या विपक्ष में, लेकिन बहस का केंद्र किसान व किसान आंदोलन ही बना हुआ है। आजादी के बाद देश के इतिहास में अपवाद को छोड़कर पहले ऐसा कभी भी नहीं हुआ। निर्विवाद रूप से किसानों के लिए यह उपलब्धि एक बहुत बड़ी व अभूतपूर्व जीत मानी जा सकती है। विभिन्न राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए किसानों को धर्म ,जाति ,भाषा, क्षेत्र आदि के नाम से हमेशा ही विभाजित रखने की कोशिश करते रहे है। किसान उनके मनगढ़ंत व झूठे झांसों में फंसते ही रहे हैं ,लेकिन इस किसान आंदोलन द्वारा किसान उन बनावटी सीमाओं व बंधनों से बाहर आ चुका है।बहुत ही सुखद एहसास हो रहा है कि आज सारे देश के किसान, राजनीतिक पार्टियों द्वारा गढ़े गए झूठे मुद्दों को दरकिनार कर अपने हक के लिए एक मंच पर व एक झंडे के नीचे आ गए हैं। इस किसान आंदोलन के शुरू होने के बाद कुछ देशों ने तो कानून भी बना दिए हैं कि किसानों को उनकी उपज की कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन (लागत मूल्य) तो मिलनी ही चाहिए। यह एक बहुत शानदार शुरुआत है। किसानों ने मोदी सरकार के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को पकड़ लिया है और ऐसा सबक सिखा दिया गया है कि भविष्य में किसानों के बारे में यदि कोई कानून बना, तो किसान संगठनों के साथ विचार विमर्श करना न केवल मोदी सरकार के लिए, बल्कि हर आने वाली सरकार के लिए उसकी बाध्यता हो जाएगी। किसानों की एकजुटता, उनका शांतिपूर्ण व अनुशासित आंदोलन तथा विशेष रुप से बहुत बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी विश्व के इतिहास में एक अनूठा उदाहरण बन गयी है ।भविष्य में भारत ही नहीं ,बल्कि कई देशों के विभिन्न पाठ्यक्रमों में भी इस आंदोलन की कहानी निश्चित रूप से शामिल की जायेगी। उन **जयचंदो व शकूनियों** की कहानियां भी पढ़ने को मिलेंगी, जिन्होंने इस आंदोलन को असफल करने, बदनाम करने व खत्म करने हेतु अनेक प्रकार के झूठे षड्यंत्र रचे। इस आंदोलन ने अपनी सफलता के रूप में किसानों व कृषि क्षेत्र की दशा व दिशा निर्धारित करने हेतु बहुत मजबूत नींव तो लगा ही दी है। **प्रश्न प्रत्यक्ष रुप से हार या जीत का नहीं है बल्कि प्रश्न यह है कि किसान अपने हक व अपने मुद्दे पर जागरूक हो गया है।**आज प्रत्येक गांव का अनपढ़ किसान भी एमएसपी पर बात कर रहा है। इस आंदोलन से पहले गांव के पढ़े-लिखे किसान भी एमएसपी के बारे में नहीं जानते थे ।यह कोई छोटी मोटी उपलब्धि नहीं है। बीजेपी सरकार को एमएसपी की बात माननी ही पड़ेगी और अंदर खाने पार्टी व सरकार में इस बात का दबाव भी बन रहा है।लेकिन बीजेपी ने जिस प्रकार अध्यादेश लाते वक्त कोरोना काल को चुना था, उसी तरह अब सरकार उस अवसर की तलाश में है, जिस अवसर पर एमएसपी देने की गारंटी की बात स्वीकार करने पर यूपी जैसे बड़े राज्य के चुनाव में उसे भुनाया जा सके। आज एमएसपी के प्रति किसान इतना जागरूक हो गया है कि आज नहीं तो कल, 2021 में नहीं तो 2022 में, सरकार को एमएसपी पर फसल खरीदने की कानूनी गारंटी तो देनी ही पड़ेगी !!!
**इस आंदोलन में किसानों द्वारा दी गई कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जाएगी, बल्कि भविष्य में उनकी कुर्बानियां पर गांवों में गीत गाए जाएंगे ।** तकनीकी रूप से चाहे इस आंदोलन को सफलता मिले या ना मिले, लेकिन धरातल पर व कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने हेतु यह आंदोलन जितना सफल हुआ है, उसकी तो पहले कल्पना ही नहीं की थी!!!! भविष्य में आने वाली सभी सरकारों के लिए इस आंदोलन ने एक बड़ा सबक सिखा दिया है तथा साबित कर दिया है कि **सत्ता के मद में डूबे हुए किसी अहंकारी राजा** द्वारा छोड़े गए अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को पकड़ने की ताकत किसानों में है!!!! यह अभूतपूर्व आंदोलन भविष्य में लिखे जाने वाले इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है……
जय जवान जय किसान

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