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🙏🌸*01.3.21 वेदवाणी*🙏 अस्माकं जोष्यध्वरमस्माकं यज्ञमङ्गिरः। अस्माकं शृणुधी हवम्॥ ऋग्वेद ४-९-७॥🙏🌸

🙏🌸*01.3.21 वेदवाणी*🙏

अस्माकं जोष्यध्वरमस्माकं यज्ञमङ्गिरः।
अस्माकं शृणुधी हवम्॥ ऋग्वेद ४-९-७॥🙏🌸

हमारे प्रिय प्रभु ! आप हमारे हिंसा से रहित यज्ञनिक कर्मों को स्वीकार कीजिए। हमारी आराधना को स्वीकार कीजिए। हम आपके प्रिय सदैव बने रहें।🙏🌸

Our dear lord ! Please accept our non-violent Yagnik Karma (acts for the welfare of others). Accept our worship. May we always remain to be your beloved. (Rig Veda 4-9-7)

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