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कौशाम्बी 21 फरवरी*यूपीआजतक न्यूज़ से कौशाम्बी की खास ख़बरे

[21/02, 3:32 PM] +91 99191 96696: *नगरीय क्षेत्र के मजदूरों को क्यों नहीं दी जाती मनरेगा में मजदूरी*

*कौशांबी* केंद्र और प्रदेश सरकार मजदूरों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है गांव ग्रामीण क्षेत्र में मजदूरों को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना का संचालन सरकार द्वारा किया जा रहा है इस योजना के जरिए गांव में रहने वाले गरीब परिवार के मजदूर ग्राम पंचायत से मजदूरी का काम करने के बाद अपना जीविकोपार्जन चला रहे है लेकिन नगर पंचायत नगर पालिका और नगर निगम सीमा क्षेत्र में निवास करने वाले गरीब कमजोर असहाय मजदूर परिवार को मनरेगा योजना में मजदूरी करने का कोई नियम सरकार द्वारा नहीं बनाया गया है जिससे कस्बों शहरों नगरों में रहने वाले गरीब परिवारों को सरकार से रोजगार नहीं मिल पा रहा है आखिर नगर और गांव के मजदूरों के बीच केंद्र प्रदेश सरकार क्यों पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है इसे लेकर आम जनता के बीच चर्चाएं तेज होती हैं शहर नगर क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार देने की योजना बनाने का प्रयास अभी तक सांसद विधायक ने भी नहीं किया है केंद्र प्रदेश सरकार को मनरेगा योजना के नियमों में परिवर्तित करते हुए नगर शहर क्षेत्र के मजदूरों को भी काम देने की योजना शामिल करनी होगी तभी नगर शहर क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार मिल सकता है

[21/02, 3:32 PM] +91 99191 96696: *आयोग्य कक्ष निरीक्षकों के जरिए बोर्ड परीक्षा कराने की तैयारी में जुटा शिक्षा विभाग*

*शिक्षा विभाग के अधिकारी कक्ष निरीक्षकों और केंद्र व्यवस्थापकों की योग्यता से खिलवाड़ कर करोड़ों की करते हैं अवैध वसूली*

*कौशांबी* बीते तीन दशक से आयोग्य शिक्षकों अयोग्य कक्ष निरीक्षक आयोग्य केंद्र व्यवस्थापक के द्वारा बोर्ड परीक्षा शिक्षा विभाग के अधिकारी सम्पन्न करा कर करोड़ों की काली कमाई में मस्त है बीते वर्षों में नकल विहीन बोर्ड परीक्षा संपन्न कराने में असफल हो चुके कई जिला विद्यालय निरीक्षको पर शासन की गाज गिर चुकी है बार बार आला अधिकारियों और शासन का ध्यान आकृष्ट कराए जाने के बाद भ्रस्ट शिक्षा अधिकारियों के कारनामों पर रोक नहीं लग सकी हैं कौशांबी जिले में फिर जिला अधिकारी को गुमराह कर जिला विद्यालय निरीक्षक आयोग्य अध्यापकों आयोग्यकक्ष निरीक्षकों और आयोग्य केंद्र ब्यवस्थापको के जरिए बोर्ड परीक्षा 2021 कराने की तैयारी में जुटे हैं

सूत्रों की माने तो बोर्ड परीक्षा केंद्रों में आयोग्य कक्ष निरीक्षकों अध्यापकों और आयोग्य केंद्र व्यवस्थापको की तैनाती देने के आड़ में शिक्षा विभाग में करोड़ों की अवैध वसूली शिक्षा माफियाओं से बेखौफ तरीके से होती है शिक्षा माफिया विभाग में मोटी रकम देकर परीक्षार्थियों से धना दोहन करते हैं आयोग्य अध्यापकों और आयोग्य केंद्र व्यवस्थापको की तैनाती करने के बाद बोर्ड परीक्षा केंद्रों में निष्पक्ष परीक्षा कराया जाना संभव नहीं होता है और परीक्षार्थियों से तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर शिक्षा माफियाओं और उनके गुर्गों द्वारा धनदोहन होता है वर्ष 2021 की बोर्ड परीक्षा में आयोग्य अध्यापकों और आयोग्य केंद्र व्यवस्थापको की तैनाती के मामले को क्या शासन-प्रशासन अभी से संज्ञान लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक के भ्रष्ट कारनामों को उजागर कर निष्पक्ष बोर्ड परीक्षा संपन्न कराने का प्रयास करेंगे या फिर सब कुछ शिक्षा माफियाओं के दबाव में बीते वर्षों की तरह इस वर्ष की बोर्ड परीक्षा संचालित होती रहेगी यह बड़ा सवाल है

[21/02, 3:32 PM] +91 99191 96696: *अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में हिंदी माध्यम की टीचर की तैनाती*

*कौशांबी* उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के भी गजब की कहानी है सरकार ने हिंदी मीडियम के स्कूलों को उच्चीकृत कर अंग्रेजी माध्यम के जूनियर स्कूल बनाने में करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर दिया है अंग्रेजी माध्यम के इन स्कूलों में अभी भी हिंदी मीडियम की टीचरों की तैनाती की गई है जिससे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है इतना ही नहीं उच्चीकृत मॉडर्न जूनियर स्कूल पूरी तरह से मजाक बनकर रह गया है सिराथू तहसील क्षेत्र के कशिया पश्चिम गांव में संचालित उच्चीकृत मॉडर्न जूनियर हाई स्कूल में तैनात शिक्षिका प्रेमा देवी आए दिन बीमारी का बहाना कर स्कूल से गायब रहती है इस मामले में भी शिक्षा अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई है इससे स्कूली छात्रों का भविष्य बर्बाद होना तय हैं

[21/02, 3:32 PM] +91 99191 96696: *राष्ट्रीय राजमार्ग सड़कों पर कम समय में प्लास्टिक के अवरोधक हुए नष्ट*

*कौशांबी* राष्ट्रीय राजमार्ग की तमाम सड़कों में जगह जगह पर प्लास्टिक के अवरोधक ब्रेकर बनाए गए थे जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़कों पर भी दर्जनों प्लास्टिक के ब्रेकर अवरोधक बनाए गए हैं प्लास्टिक के बेकर को अधिक टिकाऊ माना गया था और दुर्घटना से बचाव के लिए इसे उपयोगी माना गया था केंद्र सरकार द्वारा सड़क में ब्रेकर बनाए जाने में करोड़ों रुपए का बजट एनजीओ संचालक को अवमुक्त कर दिया गया लेकिन सड़क पर बनाए गए प्लास्टिक के ब्रेकर कुछ महीने में भी नष्ट हो गए हैं एनजीओ संचालक ने घटिया क्वालिटी के प्लास्टिक रबड़ के ब्रेकर बनाकर केंद्र सरकार से धन ले लिया है लेकिन गुणवत्ता बेहद खराब कर दी है इस मामले में यदि जांच कराई गई तो एनजीओ संचालक का घोटाला उजागर होना तय है

 

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