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कौशाम्बी 20 फरवरी*स्त्री और समकालीन दुनिया विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय*

कौशाम्बी 20 फरवरी*स्त्री और समकालीन दुनिया विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय*

*कौशाम्बी* महामाया राजकीय महाविद्यालय, कौषाम्बी में स्त्री और समकालीन दुनिया विषय पर आयोजित दो दिवसीय राश्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस दिनांक-20 फरवरी का आरम्भ सरस्वती वंदना एवं अतिथिगणों के स्वागत से हुआ। संगोष्ठी के दूसरे दिन द्वितीय वैचारिक सत्र का विषय सम कालीन समाज और स्त्री रहा। इस सत्र में अध्यक्ष के रुप में डा0 आलोक प्रसाद, प्रोफेसर, मध्यकालीन इतिहास, इलाहाबाद विष्वविद्यालय, इलाहाबाद, मुख्य वक्ता के रुप में डा0 भूरे लाल एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विष्वविद्यालय, इलाहाबाद व विषिश्ट वक्ता के रुप में डा0 सरिता असिस्टेंट प्रोफेसर, बैकुण्ठी देवी महाविद्यालय, आगरा एवं डा0 धर्मेन्द्र अग्रहरि, असिस्टेंट प्रोफेसर, भवन्स मेहता कौषाम्बी उपस्थित रहे। संगोष्ठी के द्वितीय वैचारिक सत्र की अध्यक्षता कर रहे डा0 आलोक प्रसाद ने डा0 अम्बेडकर के महिलाओं के प्रति विचारों पर चर्चा करते हुये समाज की प्रगति के लिये महिलाओं की सहभागिता पर प्रकाष डाला। आपने जातिवाद और लैगिंग समानता पर भी चर्चा की।

मुख्य वक्ता डा0 भूरे लाल ने समकालीन स्थिति में स्त्री के मानवीय अस्तित्व एवं अस्मिता पर प्रकाश डालते हुये स्त्री विमर्ष के चिन्तन की आवष्यकता पर विचार व्यक्त किये। विषिश्ट वक्ता डा0 सरिता एवं डा0 धर्मेन्द्र अग्रहरि ने समाज में महिला व पुरुशों की समान सहभागिता की बात की। आपने बताया कि नौकरी मिलने के बाद भी महिला आत्मनिर्भर व अपना निर्णय लेने के लिये स्वतन्त्र नहीं है। इस सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डा0 अनिल कुमार, प्रवक्ता गणित, महामाया राजकीय महाविद्यालय, कौषाम्बी द्वारा किया गया।

दिनांक 20.फरवरी को संगोश्ठी के दूसरे दिन तृतीय वैचारिक सत्र का विशय सम कालीन राजनीति एवं स्त्री रहा जिसकी अध्यक्षता डा0 उमेष प्रताप सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, अर्थषास्त्र विभाग, इविंग क्रिष्चियन कालेज, प्रयागराज द्वारा की गई एवं मुख्य वक्ता के रुप में डा0 राजेष गर्ग, एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विष्वविद्यालय, इलाहाबाद व विषिश्ट वक्ता के रुप में डा0 रीता दयाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, प्राचीन इतिहास, महामाया राजकीय महाविद्यालय, कौषाम्बी उपस्थित रहे। सत्र की अध्यक्षता कर रहे डा0 उमेश प्रताप सिंह ने महिला को सशक्त करने के लिये उन्हें आर्थिक रुप से सशक्त होने की आवष्यकता पर प्रकाश डाला जिससे उनमें निर्णय लेने की क्षमता का विकास हो सके। मुख्य वक्ता डा0 राजेष गर्ग ने कहा कि इस पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री का शोशण हो रहा है लेकिन समाज में स्त्री ही स्त्री का शोशण कर रही है। आपने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।

विषिश्ट वक्ता डा0 रीता दयाल ने अपने वक्तव्य में यह ज्वलन्त प्रष्न उठाया कि क्या स्त्री एक विमर्ष की वस्तु है। संगोश्ठी के तृतीय वैचारिक सत्र में डा0 अजय कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर हिन्दी, महामाया राजकीय महाविद्यालय, कौषाम्बी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।इस राश्ट्रीय संगोश्ठी के समापन सत्र का विशय भविष्य का समाज एवं स्त्री रहा सत्र में अध्यक्ष के रुप में प्रोफेसर अनीता गोपेष, कथाकार एवं अध्यक्ष, जन्तु विज्ञान विभाग, इलाहाबाद विष्वविद्यालय, इलाहाबाद, मुख्य अतिथि के रुप में डा0 हिरेन्द्र प्रताप सिंह, संयुक्त निदेषक, उच्च षिक्षा निदेषालय, उत्तर प्रदेष, प्रयागराज एवं विषिश्ट अतिथि के रुप मे डा0 आनन्द प्रकाष पाण्डेय, पूर्व सहायक निदेषक, उच्च षिक्षा निदेषालय, प्रयागराज एवं पूर्व प्राचार्य, महामाया राजकीय महाविद्यालय, कौषाम्बी ने अपने वक्तव्यों से श्रोताओं को लाभान्वित किया। प्रोफेसर अनीता गोपेष ने अपने वक्तव्य में समतामूलक समाज की परिकल्पना करते हुये आज समाज की हिंसात्मक प्रकृति पर चिन्ता व्यक्त की। आपने कहा कि स्त्रियों के पक्ष में न धर्म है न समाज और न ही संस्कृति, तो किस प्रकार महिलाओं का विकास होगा। सत्र में उपस्थित मुख्य अतिथि डा0 हिरेन्द्र प्रताप सिंह जी ने स्त्रियों के विकास के लिये केन्द्र से राज्य तक मिषन षक्ति प्रोग्राम चलाये जाने की बात कही जिसमें महिलाओं को दिये जा रहे प्रषिक्षण द्वारा उनका बहुआयामी विकास हो सके। विषिश्ट अतिथि डा0 आनन्द प्रकाष पाण्डेय ने महिलाओं की समस्याओं को चिन्हित करने, उनका निदान करने और एक नैतिक समाज की आवष्यकता पर अपने विचारों को व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डा0 अजय कुमार एवं डा0 स्वाति चौरसिया ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न विष्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आये हुये विद्वतजनों के साथ षोधार्थियों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। दो दिवसीय संगोश्ठी के सफल आयोजन में सहभागी व महाविद्यालय परिवार के प्राचार्य डा0 हर्शवर्द्धन मिश्र, डा0 स्वाति चौरसिया, डा0 अजय कुमार, डा0 अनिल कुमार, डा0 नीलम बाजपेई, डा0 भावना केसरवानी, डा0 रीतादयाल, डा0 तरित अग्रवाल, डा0 नीरज कुमार सिंह एवं डा0 रमेश चन्द्र उपस्थित रहे।

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