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इटावा 20 फरवरी ब्रेकिंग न्यूज़ upaajtak से

[2/20, 5:00 PM] +91 97611 82082: * टीबी रोगियों को दी जा रही है पोषण के लिए आर्थिक मदद*

*निश्चय पोषण योजना के तहत इलाज के लिये प्रति माह मिलते हैं 500 रूपए*

*बेहतर पोषण देकर 2025 तक बीमारी खत्म करने का लक्ष्य*

*इटावा,20 फरवरी 2021*

टीबी रोगियों का विशेष ध्यान रखने तथा उनके नियमित जांच और इलाज के लिये में सरकार द्वारा संचालित निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी रोगियों को लाभान्वित किया गया है। निक्षय पोषण योजना में टीबी की पुष्टि होने पर संबंधित रोगी के उपचार के साथ ही उसे पोषण के लिए ₹500 प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाती है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एनएस तोमर ने बताया कि वर्ष 2025 तक देश से टीबी को जड़ से मिटाने का सरकार का लक्ष्य है। इसलिये 2 हफ्ते से अधिक खांसी आने पर बलगम की जांच कराएं। टीबी को छुपाने से बीमारी बढ़ती है और यह बीमारी परिजनों को भी अपनी चपेट में ले लेती है। समय से इलाज न कराना व पूरा इलाज न होने पर टीबी का फिर से इलाज शुरू करना बहुत ही लम्बा और कष्टदायी हो सकता है। साथ ही यह एमडीआर टीबी का रूप भी ले सकता है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर बी एल संजय ने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत ₹500 प्रति माह की दर से पोषण हेतु आर्थिक मदद दी जाती है। इसके लिए संबंधित क्षय रोगी को अपने बैंक खाते का विवरण व मोबाइल नंबर सम्बंधित अस्पताल जहाँ से वह इलाज ले रहा है वहां उपलब्ध कराना होता है। इस डिटेल को निक्षय पोषण पोर्टल में अपलोड कर दिया जाता है, और मदद के तौर पर उसके खाते में हर माह ₹500 डीबीटी के जरिए भेजे जाते है। साथ ही बताया की यदि किसी कारणवश क्षयरोगी का खाता नहीं खुला है, ऐसी स्थिति में क्षयरोगी की सहमति से यह राशि उसके सम्बन्धी के खाते में भी भेजी जाती है।

उन्होंने बताया कि निक्षय पोषण योजना की धनराशि संबंधित रोगी के पोषण (खाने पीने) के लिए बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है। शुरुआत में दो माह का एक साथ ₹ 1000 बैंक खाते में भेजे जाते हैं। इसके बाद हर माह ₹500 से धनराशि संबंधित के खाते में भेजी जाती है। इस योजना के तहत निजी चिकित्सक के द्वारा जो क्षयरोगी इलाज करवा रहे हैं , निजी चिकित्सक द्वारा उनके इलाज की सूचना क्षयरोग विभाग को देने पर निजी चिकित्सक को 500 रूपए तथा इलाज पूर्ण होने की सूचना देने पर अतिरिक्त 500 रूपए प्रति रोगी दिए जाते हैं। इसके अलावा यदि किसी क्षयरोगी को दवा लेने घर से बहुत दूर आना पड़ता है जिसके कारणवश कठिनाई होती है , ऐसे में ट्रीटमेंट सप्पोर्टर (क्षयरोगी के घर के नजदीक ) की मदद से दवाई आसानी से उपलब्ध करवा दी जाती है , जिसके लिए क्षयरोगी के पूरे इलाज के बाद ट्रीटमेंट सप्पोर्टर को हज़ार रूपये की तय राशि दी जाती है।

*कब तक मिलता आर्थिक लाभ*

जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया अमूमन टीबी का इलाज 6 माह तक चलता है। एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) केस में यह इलाज 9 से 11 माह तक चलता है। एमडीआर केस का पहले 24 माह तक इलाज चलता था। अब इस तरह के केस भी 11 माह में ठीक हो जाते हैं। इस प्रकार टीबी के रोगी को निक्षय पोषण योजना का लाभ 6 से लेकर के 11 माह ( इलाज चलने तक) तक मिलता है।
जिला क्षय रोग विभाग जिला समन्वयक कंचन तिवारी ने निजी अस्पतालों के मरीजों से अपील की है कि वह अपना आधार कार्ड व बैंक अकाउंट नंबर और बीमारी से संबंधित अभिलेख लेकर टीवी अस्पताल में आकर दिखाएं और निक्षय पोषण योजना का लाभ ले
*लाभकारी है मदद*

जनपद इटावा के एक क्षय रोगी ने बताया कि सरकार की निक्षय पोषण योजना क्षय रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। उनके खाते में पांच सौ रुपए हर माह पहुंच रहे हैं।

बसरेहर ब्लॉक के एक क्षय रोगी ने बताया आज के दौर में ₹500 एक माह के लिए बहुत ही कम है, लेकिन सामान्य व्यक्ति व आर्थिक तंगी झेल रहे क्षय रोगी के लिए यह मदद बहुत ही लाभकारी साबित हो रही है।
[2/20, 5:01 PM] +91 97611 82082: समाज में बदलाव लाने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करने की खास योजना
मिशन शक्ति अभियान
– महिला कल्याण विभाग ने सात करोड़ से अधिक लोगों को किया जागरूक
– अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘अनंता’ मेगा इवेंट का होगा आयोजन
– महिलाओं की सफलता की कहानी देगी प्रेरणा, प्रेरक महिलाओं का होगा प्रचार-प्रसार
– सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार से आएगा समाज में बदलाव
– मिशन शक्ति को अप्रैल के बाद भी नए रूप में जारी रखने के लिए बनेगा रोड मैप
इटावा,20 फरवरी-2021 ।
सूबे की महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए चलाये जा रहे विशेष मिशन शक्ति अभियान के तहत मार्च माह की थीम “महिलाओं तथा बच्चों में सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार” तय की गयी है । इसके तहत महिलाओं और बच्चों को अपने हक़ की लड़ाई में प्रभावी संचार की भूमिका के बारे में जागरूक किया जाएगा । इसके साथ ही समाज में समाज में सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार के माध्यम से रुढ़िवादी मान्यताओं को दूर करने के लिए सकारात्मक माहौल बनाया जाएगा । इसके अलावा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली महिलाओं की पहचान कर उनकी सफलता की कहानियों का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि अन्य महिलाओं के लिए वह प्रेरक की भूमिका अदा कर सकें ।
महिला कल्याण विभाग द्वारा मिशन शक्ति के तहत अब तक करीब 7.06 करोड़ लोगों को जागरूक किया गया है, जिसमें 4,27,45,135 महिलाएं और 2,78,68,302 पुरुष शामिल हैं ।
महिला कल्याण विभाग के निदेशक और मिशन शक्ति के नोडल अधिकारी मनोज कुमार राय का कहना है कि बहुत से क्षेत्रों में आज भी महिलाओं और बच्चों को भेदभाव व लैंगिक असमानता का शिकार होना पड़ता है, ऐसे में उनको उन स्थितियों से उबारने में प्रभावी संचार की बड़ी भूमिका है । इसी को ध्यान में रखते हुए यूनिसेफ के सहयोग से विशेष सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार माड्यूल तैयार किया गया है और मार्च माह में इसी माड्यूल के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रमों का संचालन किया जाएगा । इन कार्यक्रमों में हम बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के साथ सम्मिलित रूप से कार्य कर रहे हैं ।
कार्ययोजना के मुताबिक एक से सात मार्च तक प्रत्येक जनपद के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की ऐसी महिलाओं की पहचान की जाएगी जिनके प्रयासों ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाये हों । इसके साथ ही उनकी कहानी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का काम कर सके । इनमें वह महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं जिन्होंने महिलाओं और बच्चों के विकास, सुरक्षा व संरक्षण के लिए असाधारण कार्य किये हों । इनमें महिला कल्याण या बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की प्रतिभावान, सरवाइवर या प्रेरक महिलाओं को भी शामिल किया जा सकता है ।
अनंता :
महिला कल्याण विभाग ने इस तरह का सामाजिक बदलाव लाने वाली महिलाओं की कहानियों को आमंत्रित किया है ताकि इनकी कहानियों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (आठ मार्च) पर मेगा इवेंट “अनंता” के माध्यम से टीवी, रेडियो, ऍफ़एम, कम्युनिटी रेडियो, टाक शो, गोष्ठियों, समाचार पत्रों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जा सके ।
सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार माड्यूल पर प्रशिक्षण :
विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मास्टर ट्रेनिंग इसी माड्यूल के आधार पर एक से 10 मार्च के मध्य की जाएगी । इसमें हर जिले के बाल संरक्षण इकाई के एक-एक सदस्य, महिला शक्ति केंद्र से एक-एक सदस्य, हर जिले से चार-चार मुख्य सेविका को बैचवार प्रशिक्षण दिया जाएगा । यह प्रशिक्षण राज्य स्तर पर ऑनलाइन दी जाएगी । यही मास्टर ट्रेनर अन्य विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को 10 से 31 मार्च के मध्य प्रशिक्षण प्रदान करेंगे । इसमें जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला शक्ति केंद्र, वन स्टॉप सेंटर, मुख्य सेविका और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका को शामिल किया जाएगा ।
मिशन को सतत रूप से आगे बढ़ाने का रोड मैप होगा तैयार :
महिला कल्याण विभाग के आह्वान पर समस्त जिलाधिकारी ‘मिशन’ को अप्रैल 2021 के बाद भी सतत रूप से जारी रखने हेतु अगले एक वर्ष का रोड मैप तैयार करके 31 मार्च तक विभाग को सौंपेंगे । इसके अंतर्गत महिलाओं और बच्चों के मुद्दों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी ।

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