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इटावा 13 फरवरी*राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने थाना नजीराबाद पहुंचकर की जांच, आरोपियों से की पूछताछ*

इटावा 13 फरवरी*राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने थाना नजीराबाद पहुंचकर की जांच, आरोपियों से की पूछताछ*

*सैफई के सुघर सिंह पत्रकार पर दर्ज दो मुकदमे की जांच करने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम पहुंची कानपुर*

*आरोपियों समेत एक दर्जन पुलिसकर्मियों के लिए गए ब्यान*

*सैफई के सुघर सिंह पत्रकार ने नजीरबाद पुलिस पर फर्जी फँसाये जाने का लगाया था आरोप*

*कानपुर /लखनऊ* । सैफई के वरिष्ठ पत्रकार सुघर सिंह को थाना नजीराबाद जिला कानपुर नगर पुलिस द्वारा दो मुकदमे लगाकर जेल भेजे जाने की जांच करने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम दिल्ली से कानपुर आ चुकी है।
आयोग की दो सदस्यीय टीम सबसे पहले थाना नजीरावाद पहुंची और गिरफ्तारी की जगह व कई जगह का निरीक्षण किया। सभी आरोपी अधिकारियों के तीन बार ब्यान दर्ज किए व सुघर सिंह पत्रकार के भी ब्यान दर्ज किए गए।

सैफई के सुघर सिंह पत्रकार ने आईजी मोहित अग्रवाल, डीआईजी अनन्तदेव, सीओ गीतांजलि, एसओ मनोज रघुवंशी, उपनिरीक्षक नगेन्द्र यादव, उपनिरीक्षक, संजय शुक्ला, यतीश कुमार, हेड कांस्टेबल मुहम्मद अहमद, आरक्षी प्रदीप कुमार, आरक्षी इंद्रपाल, आरक्षी कन्हैयालाल, पर फर्जी गिरफ्तारी करके 2 मुकदमा लगाकर जेल भेजने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मेरे द्वारा कानपुर के थाना फजलगंज, थाना पीजीआई लखनऊ, थाना पीपरपुर अमेठी, थाना सैफई जिला इटावा, थाना करहल जिला मैनपुरी में लगभग 50 अभियुक्तो के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कराए है जिनमें कुछ में अभियुक्तो के विरुद्ध चार्जसीट जा चुकी है। शातिर अभियुक्तो के विरुद्ध प्रदेश के कई जिलों में लूट, आईटीएक्ट, 7 सीएलए, व गंभीर धाराओं के लगभग 40 मुकदमे दर्ज है अभियुक्त लगभग 24 बार अमेठी, बनारस, इलाहाबाद व अन्य जिलो से जेल जा चुके है। लेकिन कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल और इटावा पुलिस की नजर में अभियुक्त शरीफ है इसलिए उन्हें लगातार बचाया जा रहा है। मेरे कहने के बाबजूद आईजी ने अभियुक्तो के विरुद्ध मुकदमे की विवेचना किसी अन्य जिले से नही कराई जब कि आईजी को दर्जनों पत्र दिए गए वादी को अधिकार है कि अपने मुकदमे की विवेचना का विवेचक कभी भी बदलवा सकता है। कई मुकदमे में विवेचकों द्वारा जांच में लापरवाही भी बरती गई जिसकी जांच डीजीपी विशेष जांच उत्तर प्रदेश द्वारा एसएसपी फतेहगढ़ से करायी गयी थी जिसमे विवेचक दो सीओ को लापरवाही का दोषी माना गया। जिनके खिलाफ जांच आख्या में लिखा गया है परंतु उसके बाद भी मेरे मुकदमे की विवेचना नही बदली गयी। इसके अलाबा 8 सीओ ने विवेचना में लापरवाही की है जिसकी शिकायत शासन को की गई है इसमे आईजी मोहित अग्रवाल के कुछ खास सीओ भी शामिल है इसकी बजह से सीओ को चिढ़ थी लगातार सीओ द्वारा फर्जी मुकदमे में फाँसने की धमकी दी जा रही थी। आईजीमेरे द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में समझौता करने का दबाब लम्बे समय से बना रहे थे।
कानपुर में दर्ज फर्जी मुकदमे की जांच के लिए सुघर सिंह पत्रकार ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र व साक्ष्य भेजे गए पत्र व साक्ष्य का अध्ययन करने के पश्चात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच करने का निर्णय लिया।
सुघर सिंह पत्रकार ने बताया कि थाना नजीराबाद का तत्कालीन एसओ मनोज रघुवंशी आईजी मोहित अग्रवाल के इशारे पर काम करता था और उसकी कई शिकायते हुई थी जिनमें हर बार बचाव करने और मीडिया को ब्यान देने के लिए मोहित अग्रवाल को आगे आना पड़ता था। मोहित अग्रवाल में कई बार शिकायतों पर मनोज रघुवंशी पर कार्यवाही की बात कही थी लेकिन उसके विरुद्ध कभी कोई कार्यवाही नही हुई। और उसने इसी का फायदा उठाकर सुघर सिंह पत्रकार को जेल भेज दिया।

सुघर सिंह पत्रकार ने फोन करके बताया डीजीपी के बुलाबे पर लखनऊ मिलने गया था और बापस आते समय मनोज रघुवंशी ने सीओ गीतांजली से मिलने के लिए व्हाट्सएप्प पर कॉल करके बुलाया और बुलाकर दो फर्जी मुकदमे लगाकर जेल भेज दिया। पुलिस ने फर्जी दरोगा का कार्ड भी लगा दिया। कार्ड पर जो फ़ोटो लगी थी वो मेरे द्वारा लिखाये गए थाना सैफई में मुकदमे के अभियुक्तो व उनके साथियों द्वारा एडिट करके बनाई गई थी जिसकी लगभग 100 शिकायत वर्ष 2016 से वर्ष 2020 तक प्रदेश के सभी उच्चाधिकारियों को पंजीकृत डाक द्वारा, ईमेल, व आईजीआरएस द्वारा की जा चुकी थी जिसके सभी साक्ष्य मौजूद है। अभियुक्तो ने उसी फ़ोटो का फर्जी कार्ड तैयार किया उस फ़ोटो में सिर्फ गर्दन मेरी है बाकी वर्दी पहने धड़ किसी अन्य का है और उसी फर्जी फ़ोटो से आई कार्ड बनाकर पुलिस को दे दिया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान सभी अभियुक्त थाने में मौजूद थे और पुलिस की मोटी रकम भी दी गयी थाने में उन्हें थर्ड डिग्री दी गयी। एसओ द्वारा यह कहने का दबाब बनाया गया कि में दरोगा बनाकर अवैध बसूली करता हूँ और दबिश देने कानपुर आया था। मुझे फंसाने के लिए 4 लाख के नकली नोट भी मंगाए गए मुझे नकली नोट का सप्लायर का मुकदमा भी लगाया जा रहा था बाद में आईजी ने व डीआईजी ने दो मुकदमे लगवा दिए। और अभियुक्तो ने भी मारपीट की। मारपीट में कपड़े भी फाड़ दिए गये। फर्जी एनकाउंटर दिखाने के लिए रिवाल्वर व तमंचे से फायर भी किये गए। मुझसे बरामद 82500 रुपये नगदी व मेरी सोने की चेन अंगूठी भी पुलिस ने गायब कर दी। गाड़ी में 9 मुकदमे की 20 फाइलें, साक्ष्य की व काल रिकार्डिंग की सीडी पैनड्राइव, स्पीकर, स्टपनी, कपड़े बैटरी व अन्य सामान गायब कर दिया। जेल से आने के बाद जब फर्जी मुकदमे की जांच के लिए और रिवाल्वर की फायर की बेलस्टिक जांच के लिए उच्चाधिकारियों व शासन को पत्र लिखे तो आईजी मोहित अग्रवाल, डीआईजी प्रीतिंदर सिंह, एसओ साउथ दीपक भूकर, सीओ गीतांजली, प्रभारी निरीक्षक ज्ञान सिंह ने जिलाधिकारी को संस्तुति करके रिवाल्वर निरस्त करा दी। संस्तुति पर प्रभारी निरीक्षक ज्ञान सिंह के हस्ताक्षर फर्जी किये गए थे।
उन्होंने बताया कि अब उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है उन्हें फर्जी दो मुकदमे में 6 महीने जेल में रहना पड़ा।
आयोग ने सभी आरोपी अधिकारियों के तीन बार ब्यान दर्ज किए जांच टीम सबसे पहले थाना नजीराबाद पहुंची, और मौके बारीकी से निरीक्षण किये।आरोपी अधिकारियों से कई बार पूछताछ हुई व सुघर सिंह पत्रकार सैफई से भी कई बार पूछताछ हुई है। टीम ने मामले को कितनी गंभीरता से लिया है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आरोपी पुलिसकर्मियों के कई राउंड में ब्यान दर्ज किए गए सभी के अलग अलग ब्यान लिए गए। टीम ने पहले थाने में ब्यान लिए उसके बाद सभी को सर्किट हाउस में बुलाकर ब्यान लिये गए।

*तीन अखबारों की भी की गई शिकायत*

सैफई के सुघर सिंह ने बताया कि कानपुर के तीन अखबारों (दैनिक जागरण नही) के पत्रकारों ने मेरे मुकदमे के विरोधियो से मोटी रकम लेकर मेरे विरुद्ध फर्जी खबरे निकाली गई एक अखबार ने लुटेरा बना दिया और खबर छाप दी कि लूटपाट करने वाले बदमाश दबोचे, एक अखबार ने दरोगा बनकर अवैध बसूली करने की खबर छाप दी एक अखबार ने बोलेरो गाड़ी से हथियारों का जखीरा बरामद होना, दरोगा बनकर दबिश देना, गिरोह का सरगना, फर्जी पत्रकार, तमाम खबरे बिना तथ्य के झूठी छाप दी। जब कि इस तरह की बात न पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में थी, न ही किसी अधिकारी ने ब्यान दिया और न ही अखबार का कोई आरोप का जिक्र चार्जसीट में किया गया। सुघर सिंह ने बताया कि भारतीय प्रेस परिषद व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इन तीन अखबारों व उनके संपादक, अखबार मालिक, व कानपुर नगर के क्राइम रिपोर्टर को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सभी के विरुद्ध इटावा न्यायालय में भी मान हानि का मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। अखबारों ने बिना साक्ष्य व सबूत के फर्जी खबरे छापकर समाज मे मेरी प्रतिष्ठा खराब की है। जिसका खामियाजा अब इन पत्रकारों को भुगतना पड़ेगा।

*फोटो परिचय – सर्किट हाउस कानपुर से आयोग की टीम को ब्यान देने में बाद बाहर आते सुघर सिंह पत्रकार सैफई*

*डीजीपी कार्यालय से मिलने हेतु 17 व 18 मार्च को सुघर सिंह के पास आये फोन*

*पुलिस मुख्यालय में डीजीपी से मुलाकात की पर्ची*

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