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उत्तराखंड07 फरवरी*:-डरावनी आवाज के साथ रौद्र रूप में आई धौली गंगा, चंद मिनटों में सब कुछ तबाह,

उत्तराखंड07 फरवरी*:-डरावनी आवाज के साथ रौद्र रूप में आई धौली गंगा, चंद मिनटों में सब कुछ तबाह,
प्रभारी संपादक उत्तराखंड
सागर मलिक

जोशीमठ। अविश्वसनीय और अकल्पनीय। चटख धूप में अचानक धौली गंगा का ऐसा रौद्र रुप कि चंद मिनटों में सब तबाह हो गया। ये कहना है कि उत्तराखंड के चमोली में सैनी में आई आपदा से डरे सहमे लोगों का। तपोवन और रैनी क्षेत्र के ग्रामीण अचानक आई आपदा से भौंचक्के रह गए।
प्रत्यक्षर्दियों का कहना है कि कलकल और शांत स्वभाव में बहने वाली ऋषि गंगा इतनी तबाही मचा देगी, कभी सोचा भी नहीं था। नदी में भयंकर बाढ़ आने से जहां देखो लोग भागो-भागो की आवाजें लगा रहे थे। ऐसा आज तक ऐसा कभी नहीं देखा।
ऋषि गंगा शीर्ष भाग से ही ढलान पर बहती है। जिससे नदी का पानी तेज बहाव से निचले क्षेत्र में पहुंच गया और सबकुछ तबाह करके चला गया। रैनी गांव के शंकर राणा ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे उच्च हिमालय क्षेत्र से सफेद धुएं के साथ नदी मलबे के साथ बहकर आ रही थी। नदी के तेज बहाव से डरावनी आवाजें निकल रही थीं।
लोग नदी के पानी को देखकर अपने घरों से बाहर निकल गए। तपोवन निवासी संदीप नौटियाल ने बताया कि रोजमर्रा की तरह लोग मेहनत मजदूरी के लिए जा रहे थे। धौली गंगा पर निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना के निर्माण में मजदूर काम कर रहे थे। लेकिन सुबह दस बजे जैसे ही धौली गांव का जल स्तर बढ़ने लगा लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
कई लोग बैराज साइड काम कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों में चले जाने के लिए आवाज लगा रहे थे, लेकिन नदी की तेज गर्जना से मजदूरों को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। देखते ही देखते परियोजना का बैराज और टनल मलबे में दफन हो गया।
सैकड़ों मजदूरों के भी दबने की आशंका है। रैनी गांव के प्रेम बुटोला ने कहा कि नंदा देवी पर्वत की तलहटी से ग्लेशियर के टूटने से यह तबाही मची है। तपोवन के सुभाष थपलियाल का कहना है कि ऐसा भयंकर जल प्रलय कभी नहीं देखा था।

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