July 7, 2022

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बाँदा 25 मई*कोतवाली की बात निराली और मुंसी जी के ठाठ निराले

बाँदा 25 मई*कोतवाली की बात निराली और मुंसी जी के ठाठ निराले

बड़े दिनों बाद एक मामले को लेकर अपने जनपद बाँदा की शहर कोतवाली आज 25 मई 2021 को रात करीब साढ़े 10 बजे अपने एक मित्र के कहने पर उसके साथ जाना हुआ। पंहुचने के पहले 15 मिनट के रास्ते में यह सोचता रहा कि कोरोना महामारी को लेकर इस समय पुलिस बहुत सजग है। हजार -हजार रुपये के कई बार कोरोना का उल्लंघन करने पर लोंगो के चालान काटे गए! यंहा तक कि डंडे तो पड़े ही साथ ही मुकदमें भी लिखे गए तो कोतवाली में कोरोना को लेकर बड़ी व्यवस्था होगी । सभी के मुंह मे मास्क होगा उचित दूरियां बना कर रखी होगी। लेकिन जैसे ही कोतवाली के अंदर कदम रक्खा तो वंहा की हालत देखकर मैं दंग रह गया फिर मैंने सोंचा अरे ये तो वैसा ही है जैसे पहले था और सभी कोरोना की गाइड लाइन की तो ऐसी की तैसी करते नजर आए । राममूरत मुंसी जी बिना मास्क के ठाठ से टहलते और इधर उधर कुर्सी में बैठते नजर आए यंहा तक कि मैं अपने गले में अपने चैनल की एडेन्टि कार्ड पहने था जिसमे साफ -साफ प्रेस लिखा था इसके बावजूद मुंसी जी सिविल लाइन चौकी के एक सिपाही से सिस्टम की बात करते नजर आए उन्हें यह डर भी नही लगा कि कंही चुपके से यह पत्रकार वीडियो न बना ले खैर मैं समझ गया कि वर्तमान में पत्रकारों की क्या औकात है। वंही जिन आरोपियों को पकड़ कर लाए थे उन्हें भी बिना किसी कोरोना की गाइड लाइन का पालन कराते हुए एक साथ बैठाए थे न कोई मास्क लगाए था न किसी के बीच उचित दूरी थी सब भगवान भरोसे बैठे थे। फिर मेरा दिमाक थाने में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की तरफ गया और सोंचा कंही ये खराब तो नही हैं क्योकि कप्तान साहब कभी कभाल कैमरा रिकॉर्डिंग में नजर तो मार ही लेते होंगे । क्योंकि सब बड़े निश्चिन्त बैठे थे। मुझसे रहा न गया तो मैंने एक होमगार्ड से पूछ ही लिया क्या सीसीटीवी कैमरे खराब हैं क्या उसने कहा नहीं सब ठीक हैं । मैने फिर पूछा कि क्या कप्तान साहब कभी रिकॉर्डिंग चेक नही करते क्या वो हसने लगा कहा भैया वो साहब लोग हैं हम क्या जाने। हम समझ गए कि भैया सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली । खैर मामल यह था कि मोहल्ले के ही लड़को का आपस मे मामूली झगड़ा हो गया था इसी मामले को लेकर एक लड़का दूसरे लड़के की शिकायत पुलिस में कर आया था जिसके बाद पुलिस उस लड़के को उठा ले गई। अब चूंकि पकड़े गए लड़के की वर्तमान में दिमाकी हालात ठीक नही है और उसका इलाज भी चल रहा है उसके मां बाप छोटी बहने वैसे ही परेसान रहते हैं और लड़के के चक्कर मे रात भर घूमेंगे दूसरा डर यह भी था कि वो तो दिमाग से डिस्टर्ब है पुलिस को क्या पता उसकी हालत के बारे में कंही थाने में मामला और न बढ़ जाए चूंकि मोहल्ले का मामला था तो जाना पड़ा फिर मैंने कोतवाल साहब को फोन लगाया तो फोन सेकेंड इंचार्ज ने उठाया और मेरा परिचय जानकर बहुत ही प्यार और सलीखे से बात करते हुए उन्होंने बताया कि कोतवाल साहब का ट्रांसफर हो गया है और फिलहाल उनका चार्ज मैं ही सम्हाल रहा हूं । फिर मैंने उन्हें पूरी घटना और युवक की मांसिक स्थिति के बारे में बताया तो उन्होंने थोड़ा समय मांगा और फोन काट दिया उतनी ही देर में नाइट इंचार्ज सेकेंड दरोगा बाहर निकले तो मैने उन्हें मामला बताना चाहा तो उन्होंने तुरंत मास्क सही से लगाने की हिदायत दी चूंकि मेरा मास्क नाक से थोड़ा नीचे आ गया था। फिर मन मे तो आया कि कह दू मुझे हिदायत देने से पहले अपने थाने की व्यवस्था सुधारे मुंसी उन्हीं के सामने कुर्सी में बिना मास्क के सीना ताने बैठा है उसे हिदायत दीजिये पकड़े गए लोंगो को दूर दूर बैठाले और उनकी मास्क की व्यवस्था करें। मन में ये भी आया कि इन सबका वीडियो बना लू । चूंकि रात काफी हो चुकी थी रात के 12 बज गए थे और मैं अकेला भी था । पत्रकारों की वैसे भी वर्तमान में स्थिति बहुत खराब है रात में किसी अधिकारी को फोन कर परेसान करना ठीक नही क्योंकि वो भी बिचारे दिनभर की भाग दौड़ और दुनिया भर की जिम्मेदारी झेलने के बाद रात में सोते हैं। इसलिए मैं सांत ही रहा। और दरोगा जी पूछ पांछ के निकल लिए फिर मैंने कोतवाल साहब के नंबर में फोन किया और इसबार यह भी बताया कि युवक की लगभग 20 दिन पहले ही कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी फिर उन्होंने सिविल लाइन चौकी इंचार्ज का नंबर दिया और सारी बात बताने की बात कही। फिर वही बात मैने चौकी इंचार्ज साहब को बताई तब जाकर उन्होंने मुंसी जी से बात कराने को कहा मैने मुंसी जी की तरफ मोबाइल बढ़ाया तो मुंसी जी गाल फुलाए नजर आए और कहा मैं तुम्हारे फोन से बात नही करूंगा मैं समझ गया कि मुंसी जी का मेरी वजह से भांगड़ा बिगड़ गया इसलिए वो नाराज हैं। खैर चौकी इंचार्ज साहब अच्छे व्यक्ति निकले और उन्होंने तुरंत मुंसी जी को फ़ोन कर युवक को छोड़ने के लिए कहा खैर काफी मसक्कत के बाद एक बिमार युवक को छुड़वा पाए। फिर युवक के परिजनों को हिदायत दी कि जब तक युवक की मांसिक स्थिति ठीक न हो जाए उसे मनोचिकित्सालय में भर्ती करा दे या फिर घर से न निकलने दे।
फिर मैं घर चला आया सोने की कोसिस की तो पत्रकारिता के कीड़े कुलबुलाने लगे चुकी वीडियो तो बना नही पाया था तो सोचा थोड़ा लिख ही दू नही तो ये कीड़े सोने न देंगे। फिर जब लिखा तब जाके पत्रकारिता के कीड़े सांत हुए।

दीपक कुमार पांडेय, बाँदा