July 5, 2022

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नई दिल्ली 06 जून*रेलवे की खान-पान इकाइयों से जुड़े साढ़े तेरह लाख कर्मियों पर टूटा कोरोना का कहर*

नई दिल्ली 06 जून*रेलवे की खान-पान इकाइयों से जुड़े साढ़े तेरह लाख कर्मियों पर टूटा कोरोना का कहर*

कोरोना महामारी के कहर से रेलवे स्टेशनों पर लाखों खाने-पीने का समान बेचने वाले लाखों वेंडरों का धंधा चैपट हो गया है। हालात इस कदर खराब हो गये हैं कि अब इन वेंडरों के सामने अपने परिवार का पेट पालने की समस्या पैदा हो गयी है। इस कहर के बीच रेलवे प्रशासन की तरफ से उन्हें किसी तरह की राहत मिलना तो दूर की बात, उनसे लाइसेंस फीस की वसूली की जा रही है। इस मुसीबत से निजात दिलाने के लिए अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसीज वेलफेयर एसोसिशन ने रेल मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगायी है। रेल मंत्री को लिखे पत्र में अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसीज वेलफेयर एसोसिशन के अध्यक्ष रवीन्द्र गुप्ता ने कहा है कि 2020 में कोरोना की पहली लहर के दौरान लाॅकडाउन के समय ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बन्द था। इस साल आयी कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत में तो ज्यादातर स्पेशल ट्रेनें चलती रहीं, लेकिन बाद में जब हालत अधिक गम्भीर होने लगे तो राजधानी, शताब्दी समेत अधिकतर ट्रेनों का संचालन बन्द कर दिया गया।

फिलहाल जो थोड़ी बहुत ट्रेनें चल रही हैं वे भी बीच के स्टेशनों पर नहीं रुकती हैं। जहाँ रुकती हैं वहाँ भी कोरोना के डर के कारण अधिकतर यात्री खाने-पीने का समान नहीं खरीदते हैं। रेलवे की तरफ से भी निर्देश है कि यात्री अपने खाने-पीने का सामान घर से लेकर चलें, क्योंकि पेन्ट्रीकार में खाना नहीं मिलता है। ऐसे में खान-पान लाइसेंसधारियों की बिक्री बिलकुल नगण्य हो गयी है। रवीन्द्र गुप्ता के मुताबिक इतनी बड़ी मुसीबत के बावजूद डिवीजन स्तर के अधिकारियों की ओर से वेंडरों पर लाइसेंस फीस जमा करने का दबाव डाला जा रहा है। हालांकि जून 2020 में ही रेलवे बोर्ड ने परिपत्र जारी करके लाॅकडाउन तथा ट्रेन संचालन न होने की स्थिति में लाइसेंस फीस की वसूली नहीं करने के निर्देश सभी जोनों को जारी कर दिये थे। उन्होंने माँग की है कि इस तरह की अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी को देखते हुए रेल मंत्री को स्वयं आगे आकर रेलवे बोर्ड को निर्देश लागू करवाना चाहिये। रवीन्द्र गुप्ता ने पत्र में लिखा है कि रेलवे स्टेशनों पर लगभग दो लाख व्यवसायियों के अलावा लगभग साढ़े ग्यारह लाख कर्मचारी कार्यरत है। कोरोना के कारण काम ठप हो जाने से लगभग साढ़े तेरह लाख लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। अगर रेलवे की तरफ से लाइसेंस फीस माफ या कम नहीं की गयी तो इस पेशे से जुड़े लाखों व्यापारी व कर्मचारी मानसिक रुप से परेषान होकर निराशावादी कदम भी उठा सकते हैं।

***कोरोना में आजीविका संकट*

*लाइसेंसी लाखों छोटे वेंडरों पर रेल प्रशासन कर रहा मनमानी***

कोरोना महामारी ने रेलवे स्टेशनों पर खाने-पीने का सामान बेचने वाले लाइसेंसीज लाखों छोटे वेंडरों के सामने जीवन और जीविका दोनों का संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे हालात में रेलवे प्रशासन से उम्मीद थी कि पहले से गम्भीर आर्थिक संकट से जूझ रहे इन छोटे वेंडरों को राहत मिलेगी, लेकिन इस भयंकर संकट में उल्टे इनसे लाइसेंस फीस की वसूली की जा रही है। यह भी तब जब रेलवे बोर्ड ने जून 2020 में परिपत्र जारी कर सभी जोनों को लाइसेंस फीस पुनः निर्धाण के निर्देश जारी किए थे।

पहले से कम कमाई और पिछले साल मार्च से कोविड-19 के कारण इन पर दोहरी मार पड़ी है। इस मुसीबत से निजात दिलाने के लिए अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसीज वेलफेयर एसोसिशन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रवीन्द्र गुप्ता ने रेल मंत्री को इस सम्बन्ध में लिखा है। गुप्ता कहते हैं कि कोरोना की पिछले साल पहली लहर के दौरान लाॅकडाउन के समय टेªनों का संचालन पूरी तरह से बन्द था। इस साल आई दूसरी लहर की शुरूआत में तो ज्यादार स्पेशल रेल गाड़ियाँ चलती रही, लेकिन जब हालात और गम्भीर होने लगे तो राजधानी, शताब्दी समेत अधिकतर रेल गाड़ियों का संचालन रेलवे बन्द करता जा रहा है।

*बीच के स्टेशनों पर नहीं रुकती रेल गाड़ियाँ:-*

 

*खाद्य पदार्थ बेचने वालों के सामने रोजगार का संकट:-*