July 25, 2021

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कानपुर नगर16जुलाई*जीएसटी सचल दल बन गया है व्यापारी उत्पीड़न का पर्याय,

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कानपुर नगर16जुलाई*जीएसटी सचल दल बन गया है व्यापारी उत्पीड़न का पर्याय,

जीएसटी सचल दल बन गया है व्यापारी उत्पीड़न का पर्याय, इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।

महोदय

01 जुलाई 2017 को देश भर में लागू किए गए जीएसटी कर प्रणाली में किसी निर्मित वस्तु से संबंधित सभी करो को समाहित करते हुए एक देश एक कर का नाम देकर जीएसटी को लागू किया गया था।
4 वर्ष में जीएसटी अधिनियम में 900 से अधिक संशोधन भी हो चुके हैं। कारण बिल्कुल साफ है।कि कानून में अत्याधिक जटिलताओं और विषमताओं की भरमार है। व्यापारी और व्यापार मंडल राजस्व वसूली में पूरी तरह सरकार के साथ हैं। परंतु जो बड़ी परेशानी व्यापारी वर्ग को उत्तर प्रदेश में आती है वह जीएसटी सचल दल द्वारा व्यापारियों की एक अपराधी की तरह तलाशी लेना और इस तलाशी को जांच का नाम देकर व्यापारी का जबरन उत्पीड़न किया जाता है। जबकि जीएसटी से सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व में निरंतर बृद्धि हो रही है। इस बात की पुष्टि के लिए मई 2021 का जीएसटी कलेक्शन देखते हैं जो कि 102709 करोड रुपए रहा। जबकि अप्रैल के अंत में और पूरे मई माह में लोकडाउन के कारण सचल दल की सक्रियता नगण्य प्राय थी।इससे यह साफ हो जाता है कि जीएसटी सचल दल के बिना भी राजस्व बढ़ा है और व्यापारी ने अपनी स्वेच्छा से सरकार को “कर” दिया है।
ई बे बिल प्रणाली लागू होने के पश्चात कर अपवंचना के मौके लगभग समाप्त हो गए हैं।रुपये 49 हजार से अधिक के बिलों पर ई बे बिल आवश्यक रूप से लागू कर दिया गया।इस ई बे बिल के लागू होने के पश्चात कर चोरी की जो बात कही जाती है वह लगभग समाप्त हो गयी।और सचल दल भो अब सड़को पर कोई आवश्यकता नही लगती।चूंकि मालों का परिवहन ई बे बिल से हो रहा है।अब अधिकारियों को माल परिवहन में कोई त्रुटियां नही मिलती हैं तो अधिकारी उत्पीड़न पर उतर आते हैं और छोटे छोटे अव्यवहारिक मुद्दों पर अनावश्यक उत्पीड़न अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिये करते हैं।

50 करोड़ बार्षिक टर्नओवर वाली पंजीकृत व्यापारिक संस्थाएं अब नए नियम के अनुसार हर माल परिवहन पर ई बे बिल(पोर्टल से बिल बनाकर)ही माल का परिवहन कर सकते हैं ऐसे में करपवंचना शून्य हो जाती है।
छोटे व्यपारियो को भयमुक्त वातावरण में व्यापार करने का अवसर देते हुए माननीय प्रधान मंत्री जी ने जी एस टी में पंजीकरण से मुक्ति की सीमा बढ़ाकर 40 लाख कर दी थी।
दूसरी बात गौर करने वाली है कि छोटे व्यापारी जो 40 लाख बार्षिक टर्नओवर में नहीं आते हैं अगर उनके बिलों पर जी एस टी रजिस्ट्रेशन संख्या के अभाव मे उनके द्वारा कोई माल परिवहन होता है तो सचल दल उन्हें अपराधी की श्रेणी में रखता है। जबकि ऐसे व्यापारी जीएसटी से मुक्त रखे गए है।अब इनको सचल दल परेशान करता है और भय दिखाकर जबरन वसूली करता है।

माननीय मुख्यमंत्री जी का ध्यान फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश इस ओर दिलाना चाहता है कि आगरा में सचल दल द्वारा कुछ समय पहले मथुरा के सराफा व्यापारी के उत्पीड़न पर आपके द्वारा संज्ञान लेने पर व्यापारी को आर्थिक और मानसिक राहत मिल पाई थी। इस प्रकार के बहुत से मामलों की जानकारी भी व्यापारी भय में आकर नही देता है।यह एक सचल दल द्वारा अत्यंत उत्पीड़न का बिषय है।

वर्तमान में कुछ विशेष वस्तुओं जिनका कर चोरी का इतिहास रहा है। उनके परिवहन के लिए आर. आई.एफ.डी टैग प्रणाली. लागू कर दी गयी है। अतः उस श्रेणी के माल परिवहन में भी कर चोरी की संभावना नगण्य हो गई है ।ये वस्तुएं लोहा,सुपारी, मार्बल,तम्बाकू ,टाइल्स इत्यादि है। अतः सचल दल का होना अनुपयोगी है।

हाल के दिनों में सचल दल अधिकारियों द्वारा सड़क पर वाहनों के अनावश्यक उत्पीड़न के भय से वाहन चालक सचल दल को देखकर अपने वाहनों को दौड़ाते हैं इसी बीच कई बार वाहन पर अपना नियंत्रण खो बैठेने के फलस्वरुप दुर्घटना होती है ।जिस में सरकारी कर्मचारी और सड़क पर चलने वाले आम जनों को जान माल का भारी नुकसान होता है ।आजकल सड़को का रख रखाव इत्यादि बहुत अच्छा है इसलिए वाहनों को तेज गति से चलाए जाता है।

महोदय सचल दल व्यवस्था को समाप्त करने से सरकार को भारी राजस्व की बचत होगी इस में होने वाली वार्षिक व्यय से मुक्ति मिलेगी।जो कि सालाना 50 करोड़ या इससे भी अधिक होगी इसके अतिरिक्त विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को व्यक्तिगत सुरक्षा भी मिलेगी जो कि दुर्घटना के रूप में अक्सर घटित होती रहती है।

अतः फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश आपसे मांग करता है। जी एस टी सचल दल व्यवस्था समाप्त करने योग्य है व इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।

आपसे आशा और निवेदन है कि हमारी मांग को शीघ्र पूर्ण किया जाएगा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से-
*मध्य उ0 प्र0 सह प्रभारी – “मनोज गुप्ता” , कानपुर जिलाध्यक्ष – डॉ राजेश गर्ग, कानपुर जिला उपाध्यक्ष – मुकुल चौधरी , कानपुर जिला महामंत्री – के के पाण्डेय, मध्य उ0 प्र0 उपाध्यक्ष – पीयूष गर्ग, मध्य उ0 प्र0 मीडिया प्रभारी- संजय गुप्ता आदि थे।*

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