July 7, 2022

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औरैया 10 जून*बिधूना मे सावित्री ब्रत व वट वृक्ष की पूजन में बढ़ चढ़कर महिलाओं ने लिया हिस्सा।।

औरैया 10 जून*बिधूना मे सावित्री ब्रत व वट वृक्ष की पूजन में बढ़ चढ़कर महिलाओं ने लिया हिस्सा।।

ठाकुर अवधेश कुमार सिंह बिधूना औरैया।

आज बिधूना*कस्बे मे वटवृक्ष में महिलाओं तथा सुहागिनो ने श्रद्धा के साथ सावित्री व्रत व वट वृक्ष का पूजन मे हिस्सा लिया । सुहागिनों ने अपने पति के दीर्घायु व उज्जवल भविष्य की कामना के साथ जन्म जन्मांतर का साथ रहने की प्रार्थना की।
वट सावित्री व्रत करने से पति दीर्घायु और परिवार में सुख शांति आती है। वट सावित्री व्रत में ‘वट’ और ‘सावित्री’ दोनों का खास महत्व माना गया है। पीपल की तरह बरगद के पेड़ का भी विशेष महत्व है। इस व्रत में बरगद के पेड़ के चारों ओर घूमकर सुहागिनें रक्षा सूत्र बांधकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। दूसरी कथा के अनुसार मार्कण्डेय ऋषि को भगवान शिव के वरदान से वट वृक्ष के पत्ते में पैर का अंगूठा चूसते हुए बाल मुकुंद के दर्शन हुए थे, तभी से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। वट वृक्ष की पूजा से घर में सुख-शांति, धनलक्ष्मी का भी वास है
वट सावित्री व्रत की पूजा के लिए एक बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज रखे जाते हैं जिसे कपड़े के दो टुकड़ों से ढक दिया जाता है। एक दूसरी बांस की टोकरी में देवी सावित्री की प्रतिमा रखी जाती है। वट वृक्ष पर महिलायें जल चढ़ा कर कुमकुम, अक्षत चढ़ाती हैं। फिर सूत के धागे से वट वृक्ष को बांधकर उसके सात चक्‍कर लगाए जाते हैं और चने गुड़ का प्रसाद बांटा जाता है।। फोटोज नीचे

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