July 5, 2022

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इटावा 31 मई *सीनियर आईएएस देवीदयाल के निधन से इटावा में शोक की लहर

इटावा 31 मई *सीनियर आईएएस देवीदयाल के निधन से इटावा में शोक की लहर

देवीदयाल जी थे इटावा की अनोखी धरोहर व गौरव : ख़ादिम अब्बास

(सुघर सिंह सैफई)

इटावा। जाने वाले कभी नहीं आते जाने वाले की याद आती है। इटावा जनपद के मुनागंज गांव (अछल्दा) में एक सुशील संस्कारवान कबीर पंथी परिवार में जन्मे तथा उनमें पले बढ़े ,गुदड़ी के लाल देवी दयाल 80 बसंत देखने के बाद इस फ़ानी दुनिया को अपना अंतिम सलाम करके अलविदा कह गए। उनका पैतृक गांव मुनागंज पहले इटावा में आता था लेकिन वह आज औरैया जनपद का हिस्सा है।

एक दलित परिवार में जन्मे स्वर्गीय देवी दयाल ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उन्होंने उच्च कोटि की शिक्षा हासिल करके आईएएस बनने का गौरव हासिल किया और उस प्रशासनिक सेवा में आने के उपरांत उन्होंने हर वर्ग व समाज की बेहतरीन सेवा की और वह जन-जन के चहेते बन गए।उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली निराली थी ।

मृदुभाषी सौम्य , सरल स्वभाव के स्वर्गीय देवी दयाल जी ने अपने सेवाकाल में कलेक्टर ,कमिश्नर, की सीमा से गुजरते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम सचिव तक का सफर पूरा किया- इसके अतिरिक्त वह समाज सेवा में भी लगे रहे ।उन्होंने कई सामाजिक संगठन की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। तथा दबे कुचले समाज के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया।

स्वर्गीय देवी दयाल जी ने मानवीय आधार को मजबूती देते हुए प्रेम व सदभाव के कार्यक्रमों को सदैव प्राथमिकता दी तथा उन्होंने नगला खादर इटावा में अपने सहयोगियों को साथ लेकर बाबा साहब की यादगार में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर बौद्ध महाविद्यालय की स्थापना की।

स्वर्गीय देवी दयाल जी ने बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों, धर्मों व बिरादरी के लोगों का जीवन स्तर उठाने में अपनी मेहत्ती भूमिका का निर्वाह करते हुए उनकी हैसियत बना दी ।और उसी का परिणाम है कि हजारों उपेक्षित समाज के लोग आत्मनिर्भर बनकर मूल धारा में सीना चौड़ा करके अगली पंक्ति में खड़े हुए हैं।

कौमी तहफ़्फ़ुज़ कमेटी के संयोजक खादिम अब्बास ने कहा कि स्वर्गीय देवी दयाल व उनके परिजनों से हमारे सम्बन्ध लगभग 50 साल से हैं। उनके बड़े भाई महंत रविन्द्रदास जी विषारद पक्के और सच्चे कबीरपंथी थे। उनके गांव मुनागंज में कबीर बीजक का आयोजन होता था ,जिसमें देशभर के जाने-माने कबीरपंथी साधु व संत एकत्रित होते थे, जिनमें खादिम को अपने उस्ताद पूर्ण विधायक प्रोफेसर सहदेव सिंह यादव के साथ कई बार जाने का अवसर प्राप्त हुआ।
कबीरपंथी विचारधारा का इतना भव्य आयोजन देश में शायद कहीं होता हो, इस आयोजन में स्वर्गीय देवीदयाल दोहरे जी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। वह यादगार भंडारा कराते थे ।

खादिम ने कहा कि जब भी इटावा में कोई भी सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन देवी दयाल जी करते थे, उसमें विशेष रूप से वह खादिम अब्बास को कोई ना कोई जिम्मेदारी जरूर सोपते थे ,वह जनपद इटावा की आन बान शान थे। उन्होंने इटावा का देशभर में नाम रोशन किया।ख़ादिम ने कहा कि स्वर्गीय देवीदयाल कर्तव्य निष्ठ ,विवेकशील होने के साथ जनपद इटावा की धरोहर और गौरव थे।उन्होंने कहा कि आदमी जन्म से नहीं कर्म से महान होता है ।ऐसे सारे गुण स्वर्गीय देवीदयाल दोहरे जी में विराजमान थे ।

अपने शोक संदेश में ओम नारायण जी, पूर्व कमिश्नर शिवराम सिंह दोहरे , प्रसपालो के राष्ट्रीय महासचिव अनसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के डॉ धर्मेंद्र कुमार ,अशोक दोहरे ,मिशन सुरक्षा परिषद प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर कुमार दोहरे ,बुद्धा सोसायटी कानपुर मंडल के प्रभारी डी आर दोहरे , आजाद समाज पार्टी काशीराम के कानपुर मंडल मीडिया प्रभारी मोहम्मद आमीन भाई, आसपा के जिलाध्यक्ष अभिषेक आजाद,वरिष्ठ पत्रकार शेखर यादव, समाजसेवी इफ्तिखार मिर्जा, मानव हिंद एकता के अध्यक्ष अजहरउददीन ,दीपक राज, अटल विहारी, मोहम्मद हाशिम खान, व देवेंद्र चौधरी ने कहा कि स्वर्गीय देवीदयाल हम सबके प्रेरणा स्रोत थे। दयाल साहब को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी भाई चारा की संस्कृति को हम आप सब मिलकर आगे बढ़ाएं।